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जब भी ब्रेस्टफीडिंग की बात आती है, तो आमतौर पर शिशु के स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव ज्यादा चर्चा में रहता है। यह सही भी है क्योंकि मां का दूध बच्चे के लिए संपूर्ण आहार माना जाता है। लेकिन क्या ब्रेस्टफीडिंग सिर्फ बच्चे के लिए फायदेमंद है, या इसका मां की सेहत पर भी असर पड़ता है? कई महिलाओं के मन में यह सवाल आता है कि क्या स्तनपान करने से उनके शरीर को कोई नुकसान होता है, या यह उनके लिए भी लाभकारी होता है।
क्या ब्रेस्टफीडिंग से महिलाओं की सेहत को नुकसान होता है या फायदे?
ब्रेस्टफीडिंग से महिलाओं को होने वाले फायदे
ब्रेस्टफीडिंग केवल एक प्राकृतिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह मां के शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद भी होती है। सबसे पहले, स्तनपान कराने से शरीर में ऑक्सिटोसिन नामक हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जो गर्भाशय को सिकुड़ने में मदद करता है और प्रसव के बाद रक्तस्राव को कम करता है। इससे मां का शरीर जल्दी रिकवर कर सकता है।
इसके अलावा, स्तनपान करने से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और ओवरी कैंसर का खतरा कम हो जाता है। कई शोधों में पाया गया है कि जो महिलाएं अपने बच्चों को लंबे समय तक स्तनपान कराती हैं, उनमें इन बीमारियों का खतरा अन्य महिलाओं की तुलना में कम होता है।
ब्रेस्टफीडिंग का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह महिलाओं के वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है। स्तनपान के दौरान शरीर अतिरिक्त कैलोरी जलाता है, जिससे गर्भावस्था के दौरान बढ़ा हुआ वजन जल्दी कम होने में मदद मिलती है।
क्या ब्रेस्टफीडिंग से कोई नुकसान होता है?
अक्सर महिलाओं को यह चिंता होती है कि क्या ब्रेस्टफीडिंग से उनकी सेहत पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। वास्तव में, यदि मां का खानपान और देखभाल सही हो, तो ब्रेस्टफीडिंग से कोई नुकसान नहीं होता। हालांकि, कुछ महिलाओं को स्तनपान के दौरान कुछ परेशानियां हो सकती हैं, जैसे—
शारीरिक कमजोरी: स्तनपान कराने से शरीर की ऊर्जा खपत होती है, जिससे कई महिलाओं को कमजोरी या थकान महसूस हो सकती है। इसे संतुलित आहार और सही पोषण से ठीक किया जा सकता है।
स्तनों में दर्द और सूजन: कभी-कभी स्तनों में अत्यधिक दूध भर जाने से दर्द या सूजन की समस्या हो सकती है, जिसे सही स्थिति में स्तनपान कराने और गर्म सिकाई से ठीक किया जा सकता है।
कैल्शियम की कमी: लंबे समय तक स्तनपान करने से शरीर में कैल्शियम की कमी हो सकती है, जिससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। इसलिए इस दौरान कैल्शियम और विटामिन डी युक्त भोजन का सेवन करना जरूरी होता है।
ब्रेस्टफीडिंग को लेकर समाज में फैले कुछ मिथक
ब्रेस्टफीडिंग को लेकर कई तरह की भ्रांतियां समाज में प्रचलित हैं। जैसे, कुछ लोगों का मानना है कि स्तनपान कराने से स्तनों का आकार खराब हो जाता है, जबकि यह पूरी तरह से गलत है। सही देखभाल और व्यायाम करने से यह समस्या नहीं होती।
कुछ महिलाएं यह भी सोचती हैं कि स्तनपान कराने से उनका शरीर पोषण खो देगा और वे कमजोर हो जाएंगी। हालांकि, यदि वे सही आहार लें और पर्याप्त आराम करें, तो यह समस्या नहीं होगी।
ब्रेस्टफीडिंग केवल शिशु के लिए ही नहीं, बल्कि मां के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है। यह न केवल शरीर को जल्दी रिकवरी में मदद करता है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों से भी बचाव करता है। हालांकि, इस दौरान सही खानपान और देखभाल जरूरी होती है ताकि मां की सेहत पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। इसलिए, स्तनपान से जुड़े मिथकों को छोड़कर इसे एक प्राकृतिक और लाभकारी प्रक्रिया के रूप में अपनाना चाहिए।