What Is Emotional Addiction? इमोशनल एडिक्शन से ओवरकम करना है हमारी जिम्मेदारी

Apurva Dubey
06 Oct 2022
What Is Emotional Addiction? इमोशनल एडिक्शन से ओवरकम  करना है हमारी जिम्मेदारी

अगर हम अपने आस-पास नज़र डाले तो ऐसे कई रिश्तें दिख जाते है जो केवल मानसिक रूप से उस रिश्ते से बाहर न निकल पाने के कारण ही घुण की तरह उस रिश्ते की चक्की में पिसते चले जाते हैं। भले उस रिश्ते में कुछ भी न बचा हो। हाँ, एक समय तक रिश्तों में सुधार की उम्मीद रखना जयाज़ है किंतु एक लंबे अरसे तक अगर वह रिश्ता वैसा ही बना रहे जहाँ न आप खुश हो और न ही वह आपके स्वास्थ व दिमाग़ी स्वास्थ के लिए सही हो।

उस रिश्ते में रहने से न आपकी ग्रोथ हो रही है ना आपके पार्टनर की। आप चाहते हुए भी उन्हें छोड़ नहीं पाते। भले वह रिश्ता खराब से खराब मोड़ पर क्यों न खड़ा हो। बहुत खराब रिश्ते से निकलना भी अगर आपको मुश्किल लगता है, तो यह आपके इमोशनल एडिक्शन की वजह से हो सकता है।


इमोशनल एडिक्शन के लक्षण

कुछ लोग अपनी भावनाओं पर निर्भर रहते हैं, ज्यादातर उनकी निर्णय लेने की शक्ति भावनाओं के कारण  प्रभावित रहती है। हर गलती में जो उनकी नहीं होती, लॉजिकल अप्रोच की कमी के कारण उसको खुद की गलती समझ बैठते है। इसके अलावा इमोशनल एडिक्शन के शिकार लोग ज्यादातर उदास रहने लग जाते हैं और हंसने वाली बातों में भी दुख तलाशने लग जाते हैं। ऐसे में आपको इमोशनल एडिक्शन से दूर रहने की जरूरत है।

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जो चीज़ भावनाओं से संचालित होती है उसको अपने वश में करने के लिए सबसे पहली व महत्त्वपूर्ण बात यही होगी की आपको अपनी भावनाओं और प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण रखना सीखना होगा। साथ ही साथ उन कारको का मूल्यांकन करना भी आवश्यक है जो आपके निर्णयों को प्रभावित करते हैं।

ऐसा करने से आप यह निर्णय लेने में सक्षम हो सकेंगे कि आपके लिए क्या सही है और क्या नहीं। किस बिहेवियर से आपको क्या-क्या नुकसान हो सकता है।

What Is Emotional Addiction? सेल्फ बिलीफ है जरूरी

इमोशनल एडिक्शन से प्रभावित होने का एक मुख्य कारण है खुद पर विश्वास न होने की कमी। यह एक ठोस कारण है जिससे ज्यादातर मामलों में लोग खुद पर भरोसा न होने के कारण ही सही डिसीजन नहीं ले पाते। अत: आपको जरूरत है कि आप अपने ऊपर फिर से वही आत्मविश्वास बनाएं।

कुछ कदम जो उठाने है जरूरी

इस तथ्य को स्वीकार करें कि आप उन बाधाओं को दूर करेंगे जो आपके विकास में बाधक हैं। इसके लिए आपको मानसिक तौर से मजबूत होना पड़ेगा। आप मेडिटेशन और योग जैसी एक्सरसाइज का सहारा ले सकते है। इसके अलावा सेल्फ टाइम जरूर दें। कुछ अन्य लोग जिनके साथ आप कम्फर्टेबल है उनसे अपनी आंतरिक शांति और संतुष्टि पाने के लिए बातें भी कर सकते हैं।

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