नूरी खान, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) नेता, को कथित तौर पर सोमवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन में गिरफ्तार किया गया था, जब वह राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम, चौधरी से मिलने जा रही थीं। खान ने हाल ही के दिनों में कई मौकों पर स्वास्थ्य नेतृत्व पर आपत्ति जताई है और क्षेत्र में सुविधा की कमी की आलोचना भी की है।

17 मई को, उन्होंने कथित तौर पर एक ज्ञापन के साथ चौधरी से मिलने का प्रयास किया जिसमें उनकी चिंताओं की रूपरेखा और एक गुलाब भी था। स्वास्थ्य मंत्री उज्जैन शहर में COVID-19 से निपटने की व्यवस्था की समीक्षा करने के लिए गए थे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बृहस्पति भवन में बैठक कर रहे थे।

नूरी ने “जबरन” इमारत में घुसने की कोशिश की। वह मंत्री को गुलाब के साथ मांगों और शिकायतों का ज्ञापन सौंपना चाहती थीं। हालांकि, सीएसपी हेमलता अग्रवाल और टीआई मनीष लोढ़ा जो बिल्डिंग के बाहर तैनात थे, उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।

सीएसपी हेमलता अग्रवाल ने बताया कि नूरी खान को आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 जो चार या अधिक व्यक्तियों की ‘गैरकानूनी सभा’ ​​को रोकती है, का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। बाद में उनके खिलाफ धारा 151, जो व्यक्तियों को एक सभा में शामिल होने से रोकती है भी लगाई गई।

खान को सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, लेकिन उसने कथित तौर पर जमानत लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसे सेंट्रल जेल भैरवगढ़ भेज दिया गया।

नूरी खान के बारे में

नूरी खान महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर और मप्र सरकार के अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य हैं। COVID-19 महामारी के दौरान, वह उज्जैन में राज्य सरकार के कामकाज की मुखर आलोचक रही हैं। उन्हें पहले अप्रैल 2021 में भी गिरफ्तार किया गया था, और उन्होंने दावा किया कि उन्होंने केवल “अस्पताल प्रशासन को कोविड संक्रमित लोगों के साथ लापरवाही के बारे में सूचित किया था और इस समय ऑक्सीजन सिलेंडर वितरित कर रही थी।”

उनकी टीम ने उनके सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट करते हुए सोमवार को जनता से उनके समर्थन में #ReleaseNooriKhan ट्रेंड शुरू करने की अपील की।

noori khan

सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता और समर्थक खान की रिहाई की मांग कर रहे हैं। महिला कांग्रेस ने उनके पीछे रैली करते हुए ट्विटर पर लिखा, “अब मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन सौंपने के लिए उन्हें भाजपा सरकार ने हिरासत में ले लिया है। क्या जनसेवा अपराध है?”

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