Valentine Day की चमक-दमक के पीछे: प्यार की असली सच्चाई

गुलाब, चॉकलेट और कैंडल लाइट डिनर - क्या यही प्यार है? असली प्यार तो बिखरे बालों में, बीमारी में साथ देने में, और छोटी-छोटी खुशियों में छुपा है। जानिए वैलेंटाइन डे क्यों नहीं दिखा सकता प्यार की असली सच्चाई।

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Tamanna Soni
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Photograph: (Via (Unsplash))

हर साल 14 फरवरी को दुकानें लाल गुलाबों से भर जाती हैं, रेस्तरां में कैंडल लाइट डिनर के लिए लंबी वेटिंग लिस्ट लग जाती है, और सोशल मीडिया पर परफेक्ट कपल्स की तस्वीरें छा जाती हैं। हर तरफ प्यार का एक ही version दिखता है - चमकदार, परफेक्ट, फिल्मी। लेकिन क्या सच में प्यार सिर्फ इतना ही है? क्या एक दिन की ये चमक-दमक प्यार की असली कहानी बयान कर सकती है?

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वैलेंटाइन डे की चमक-दमक के पीछे: प्यार की असली सच्चाई

असली प्यार बिखरे बालों में छुपा है

रिया और अर्जुन की शादी को आठ साल हो चुके हैं। वैलेंटाइन डे पर वो कोई फैंसी रेस्तरां नहीं जाते। क्योंकि उनका असली प्यार उस दिन दिखता है जब रिया की नौकरी चली जाती है और अर्जुन चुपचाप उसके लिए चाय बनाता है, बिना कुछ पूछे। या जब अर्जुन की मां बीमार पड़ती हैं और रिया तीन रात जागकर उनकी सेवा करती है।

ये वो प्यार है जो Instagram पर नहीं दिखता। जो गिफ्ट की रैपिंग में नहीं आता। जो सिर्फ एक दिन नहीं, हर रोज़ साबित होता है। ये वो प्यार है जो सुबह 6 बजे अर्जुन के लिए लंच पैक करने में है, या शाम को रिया के सिरदर्द होने पर बिना बोले दवा लाने में है।

"लोग पूछते हैं कि वैलेंटाइन डे पर क्या प्लान है," रिया कहती है। "मैं कहती हूं - वही जो हर दिन करते हैं। साथ खाना खाना, Netflix देखना, और एक-दूसरे की बकवास सुनना। यही तो असली प्यार है ना?"

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जब प्यार का मतलब सिर्फ दिखावा रह जाए

मीरा को याद है कैसे उसके एक्स-बॉयफ्रेंड ने पिछले साल वैलेंटाइन डे पर उसे महंगा गिफ्ट दिया था। 50 लाल गुलाब, एक डायमंड ब्रेसलेट, और एक रोमांटिक डिनर। सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे उनकी तस्वीरें। लेकिन अगले ही हफ्ते जब मीरा का प्रमोशन हुआ, तो उसे कहा, "अब तो तुम्हें मेरी ज़रूरत नहीं रहेगी।"

तीन महीने बाद पता चला कि वो किसी और को डेट कर रहा था, क्योंकि मीरा अब उसकी इनसिक्योरिटी को हैंडल नहीं कर पा रही थी। वो चाहता था कि मीरा उसे ज़रूरत महसूस कराए, अपने सपने छोटे करे, ताकि उसका ego hurt न हो।

"मुझे लगा था कि जो आदमी इतने प्यार से गिफ्ट देता है, वो असली में भी केयर करता होगा," मीरा कहती है। "लेकिन प्यार गिफ्ट में नहीं, छोटी-छोटी बातों में होता है - जैसे तुम्हारी खुशी से खुश होना, न कि उससे धमकी महसूस करना। जैसे तुम्हारे सपनों को सपोर्ट करना, न कि उन्हें कुचलना।"

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आज मीरा सिंगल है और खुश है। उसने सीख लिया है कि अकेले रहना बेहतर है गलत इंसान के साथ रहने से।

प्यार बेहद मेसी होता है

असली प्यार परफेक्ट नहीं होता। वो वैलेंटाइन डे के ग्रीटिंग कार्ड्स जैसा नहीं होता जहां सब कुछ खूबसूरत और सिंपल दिखता है।

असली प्यार में झगड़े होते हैं - पैसों को लेकर, ससुराल को लेकर, बच्चों की परवरिश को लेकर। असली प्यार में कभी-कभी आप एक-दूसरे से चिढ़ते भी हैं। कभी-कभी आप सोचते भी हैं, "क्या मैंने सही फैसला लिया?"

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लेकिन असली प्यार यही है कि उन सब गंदे, मुश्किल दिनों में भी आप साथ रहने का फैसला करते हैं। जब रोमांस खत्म हो जाता है, तब भी आप एक-दूसरे के लिए वहां होते हैं।

प्रिया और राज की कहानी इसका परफेक्ट example है। शादी के तीसरे साल राज को कैंसर हो गया। सारी savings इलाज में चली गईं। प्रिया को दो जॉब करनी पड़ीं। कोई रोमांटिक डिनर नहीं, कोई गिफ्ट नहीं, कोई छुट्टियां नहीं।

"उस समय मुझे समझ आया कि प्यार क्या होता है," प्रिया कहती है। "जब राज के बाल झड़ गए, जब वो कमज़ोर हो गया, जब उसे बाथरूम तक जाने में मेरी मदद चाहिए थी - तब भी मैं उसके साथ थी। और वो भी मेरे guilt को समझता था, मेरे डर को समझता था। यही प्यार है - एक-दूसरे की सबसे कमज़ोर हालत में साथ देना।"

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आज राज cancer-free है। और उनका रिश्ता पहले से कहीं मज़बूत है।

जो टूट चुका है, वही असली प्यार कर सकता है

मेरी दादी कहती थीं, "जिसने दर्द नहीं देखा, वो किसी का दर्द नहीं समझ सकता।"

और शायद यही सच है प्यार में भी। जो आदमी अपनी ज़िंदगी में टूट चुका है, जिसने खुद का दिल टूटते देखा है, जिसने अपनी कमजोरियों को स्वीकार किया है - वही समझ सकता है कि दूसरे को कैसे संभालना है।

वो आपकी इनसिक्योरिटी को judge नहीं करेगा, क्योंकि उसकी भी हैं। वो आपके आंसुओं से नहीं घबराएगा, क्योंकि उसने भी रोया है। वो आपके डर को समझेगा, क्योंकि उसे भी डर लगता है। वो आपकी गलतियों को माफ कर देगा, क्योंकि उसने भी गलतियां की हैं।

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ये vulnerability, ये टूटना, ये imperfection - यही तो प्यार की नींव है।

प्यार हर रोज़ का है, सिर्फ 14 फरवरी का नहीं

तो इस वैलेंटाइन डे, गुलाब और चॉकलेट के पीछे मत भागिए। उस इंसान को ढूंढिए या celebrate कीजिए जो:

  • आपकी सफलता से खुश होता है, धमकी महसूस नहीं करता
  • आपके बुरे दिनों में भी साथ खड़ा रहता है
  • आपको बदलने की कोशिश नहीं करता
  • आपकी छोटी-छोटी खुशियों में शामिल होता है
  • आपके सपनों को अपना बनाता है
  • आपकी कमजोरियों को स्वीकार करता है
  • आपके परिवार को अपना मानता है

क्योंकि असली प्यार वो नहीं जो एक दिन परफेक्ट दिखे। असली प्यार वो है जो 365 दिन, बिना किसी दिखावे के, चुपचाप साथ दे। वो सुबह की चाय में है, रात के खाने की बातों में है, बीमारी में देखभाल में है, और सपनों में साथ चलने में है।

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और हां, अगर आप सिंगल हैं तो ये याद रखिए - खुद से प्यार करना भी उतना ही ज़रूरी है। किसी और का इंतज़ार करने से बेहतर है, खुद के लिए अपना बेस्ट दोस्त बनिए। अपने सपनों को पूरा कीजिए। अपनी खुशी खुद ढूंढिए। क्योंकि जब आप खुद से प्यार करते हैं, तो सही इंसान अपने आप आ जाता है।