145 साल पुरानी Darjeeling Toy Train में नया इतिहास: पहली बार महिला बनीं टिकट परीक्षक

ट्रेंडिंग न्यूज़ में दार्जिलिंग की 145 साल पुरानी टॉय ट्रेन ने इतिहास रचा है। पहली बार महिला टिकट परीक्षक की नियुक्ति हुई है, जो रेलवे में लैंगिक समानता और महिलाओं के बढ़ते प्रतिनिधित्व का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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Tamanna Soni
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Photograph: (X via (@TheDailyPioneer))

दार्जिलिंग की ऐतिहासिक टॉय ट्रेन ने अपने 145 साल के इतिहास में पहली बार एक महिला टिकट परीक्षक की नियुक्ति कर नई मिसाल कायम की है। यह कदम रेलवे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में अहम बदलाव का संकेत है। इस उपलब्धि को महिला सशक्तिकरण और बदलती सामाजिक सोच का प्रतीक माना जा रहा है।

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145 साल पुरानी दार्जिलिंग टॉय ट्रेन में नया इतिहास: पहली बार महिला बनीं टिकट परीक्षक

ऐतिहासिक धरोहर में ऐतिहासिक शुरुआत

दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की प्रसिद्ध टॉय ट्रेन भारत की सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक रेल सेवाओं में से एक है। 19वीं सदी से पहाड़ों के बीच चल रही यह ट्रेन न केवल परिवहन का साधन है, बल्कि देश की सांस्कृतिक और तकनीकी विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल इस ट्रेन ने अब अपने इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है—पहली बार महिला टिकट परीक्षक की नियुक्ति।

145 वर्षों तक टिकट जांच जैसे मैदानी कार्यों में पुरुष कर्मचारियों का ही वर्चस्व रहा, लेकिन अब इस परंपरा में बदलाव देखने को मिल रहा है। महिला कर्मचारी की यह नियुक्ति रेलवे विभाग में बढ़ती लैंगिक समानता और बदलती सोच को दर्शाती है।

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रेलवे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रेलवे ने कई ऐसे कदम उठाए हैं जिनसे महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। स्टेशन संचालन, लोको पायलट, सुरक्षा और प्रशासनिक सेवाओं के साथ-साथ अब मैदानी जिम्मेदारियों वाले पदों पर भी महिलाओं की उपस्थिति बढ़ रही है।

टिकट परीक्षक का काम जिम्मेदारी भरा होता है। इसमें यात्रियों के टिकट की जांच, यात्रा के दौरान व्यवस्था बनाए रखना, यात्रियों की सहायता करना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना शामिल होता है। ऐसे पद पर महिला कर्मचारी की नियुक्ति यह साबित करती है कि अब क्षमता और योग्यता को प्राथमिकता दी जा रही है, न कि लिंग के आधार पर सीमाएं तय की जा रही हैं।

युवा लड़कियों के लिए प्रेरणादायक कदम

दार्जिलिंग की टॉय ट्रेन में महिला टिकट परीक्षक की नियुक्ति कई युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। अक्सर तकनीकी और मैदानी नौकरियों को लेकर समाज में यह धारणा बनी रही है कि ये काम महिलाओं के लिए कठिन हैं, लेकिन आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी योग्यता साबित कर रही हैं।

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इस तरह की पहल यह संदेश देती है कि अगर अवसर दिए जाएं तो महिलाएं किसी भी जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभा सकती हैं। रेलवे जैसे बड़े और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों को भी सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित कर सकती है।

बदलती सामाजिक सोच का संकेत

यह उपलब्धि केवल एक नौकरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में बदलती सोच का भी प्रतीक है। आज महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, खेल, सेना, प्रशासन और परिवहन जैसे क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रही हैं। कार्यस्थलों पर समान अवसर और प्रतिनिधित्व को लेकर जागरूकता बढ़ने के कारण संस्थाएं भी अब महिलाओं को नेतृत्व और जिम्मेदारी वाले पदों पर आगे ला रही हैं।

दार्जिलिंग की टॉय ट्रेन जैसी ऐतिहासिक सेवा में महिला कर्मचारी की नियुक्ति यह दिखाती है कि परंपराएं भी समय के साथ बदल सकती हैं और बदलाव हमेशा प्रगति की दिशा में होता है।

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महिला सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत संदेश

145 साल पुरानी इस ट्रेन में पहली महिला टिकट परीक्षक की नियुक्ति एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल रेलवे क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि अवसर मिलने पर महिलाएं हर क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर सकती हैं।

दार्जिलिंग की पहाड़ियों में चलने वाली यह छोटी-सी ट्रेन अब एक बड़े सामाजिक बदलाव की कहानी भी अपने साथ लेकर चल रही है—एक ऐसी कहानी, जो आने वाली पीढ़ियों को यह विश्वास दिलाती है कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती।

महिला प्रेरणादायक