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क्या ऑनलाइन स्कूलिंग लड़कियों के लिए सुरक्षित है ?

Published by
Harshita Gurnani

चेन्नई में हैरेसमेंट का मामला सामने आने के बाद , यह कहना गलत नहीं होगा कि लड़कियों के लिए अब स्कूल भी सुरक्षित नहीं रहा है। दरअसल पदमा शेषाद्री बाला भवन सेकेंडरी स्कूल के एक शिक्षक ने छात्राओं के साथ बदतमीजी करने की कोशिश की थी। ऑनलाइन क्लास के समय टॉवल पहन के क्लास लेने आए थे साथ ही व्हाट्सएप पर लड़कियों को मूवी देखने जाने का प्रस्ताव रखा था। जिसकी बाद छात्रों ने हरासमेंट के खिलाफ आवाज उठाई। ऑनलाइन स्कूलिंग सुरक्षित

क्या शिक्षकों को अभी भी गुरु कहना सही होगा ?

बच्चों को बचपन से सिखाया गया है कि मां-बाप के बाद बच्चों पर दूसरा अधिकार गुरु का होता है। क्योंकि वह हमें शिक्षा देते हैं हमें जीवन में आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। लेकिन क्या राजगोपालन जैसे शिक्षक गुरु कहलाने के लायक हैं? ऐसे शिक्षकों के कारण माता-पिता का स्कूलों और शिक्षकों से विश्वास उठ रहा है।

इन मामलों में स्कूल अथॉरिटी क्या कदम उठाती है ?

ज्यादातर स्कूल अथॉरिटी ऐसे मामलों में अपनी स्कूल की इज्जत बचाने के लिए इन मुद्दों को नजरअंदाज कर देती है। जबकि बच्चों की उम्मीद स्कूल की अथॉरिटी के फैसले पर टिकी होती है।

वही स्कूल हरासमेंट का यह पहला मामला नहीं है, इसके अलावा भी इससे जुड़े कई मामले सामने आए हैं। 2017 में रयान इंटरनेशनल स्कूल गुरु ग्राम और टैगोर पब्लिक स्कूल दिल्ली में ऐसे मामले सामने आए थे। दूसरी ओर इसके बारे में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने टिप्पणी देते हुए कहा कि स्कूल अब बच्चों के लिए सुरक्षित जगह नहीं रहा है। हालांकि उनका यह कहना सही भी है।

क्या इसके लिए छात्राओं को दोषी ठहराना सही है?

क्या इसमें उन छात्राओं की गलती है जो इस हरासमेंट की शिकार हुई है? जाहिर है कि नहीं, लेकिन राजगोपालन के हिसाब से छात्राओं की गलती है। उनका मानना है कि लड़कियों की गलती है की वह अपने मनपसंद कपड़े पहनती है।

ऐसी सोच रखने वाला शिक्षक कैसे किसी और को शिक्षित कर सकता है। शिक्षक का फर्ज होता है कि वह बच्चों को अच्छे कदम पर चलना सिखाएं, उन्हें सही ज्ञान दें। लेकिन इन शिक्षकों के कारण स्कूल को मंदिर और शिक्षकों को भगवान कहना सोच में डाल देता है।

बच्चों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है ‍?

जब बच्चे ऐसी परिस्थिति से गुजरते हैं तो उनकी मानसिक स्वास्थ्य पर ही नहीं बल्कि उनकी सोच पर भी असर पड़ता है। वह अन्य मानसिक स्वास्थ्य परेशानियों से ग्रस्त हो सकते हैं। रिसर्च के मुताबिक ऐसे मामलों के कारण बच्चे डिप्रेशन, पीटीएसडी, एंजायटी डिसऑर्डर और कॉन्फिडेंस कम हो जाता है।

स्कूल हरासमेंट के कुल आंकड़े

अक्टूबर 2020 के स्टडी के अनुसार 567 छात्रों में से 57 छात्राएं सेक्सुअल एसॉल्ट की शिकार होती है। इनमें से 12 परसेंट फैकेल्टी मेंबर्स और 10 प्रतिशत स्टाफ मेंबर के द्वारा छात्राओं को हरेश किया जाता है। यहां तक कि ऑनलाइन क्लास होने के बावजूद भी ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। अगर ऐसे मामलों के लिए कुछ किया नहीं गया तो इसका हमारे एजुकेशन सिस्टम पर भी प्रभाव पड़ेगा।

ऑनलाइन स्कूलिंग सुरक्षित

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