Child Mental Health: कैसे पैरेंट्स बच्चे के मानसिक विकास को प्रभावित करते हैं

यह बात पूरी तरीके से सही है कि बच्चे अपने व्यवहार को मां-बाप से ही सीखते हैं। मां-बाप की दिनचर्या (daily lifestyle) हो सकता है थोड़ी हेक्टिक हो। कभी-कभी ऑफिस या कामकाज में काफी ज्यादा तनाव का सामना करना पड़ता है।

Swati Bundela
15 Dec 2022
Child Mental Health: कैसे पैरेंट्स बच्चे के मानसिक विकास को प्रभावित करते हैं

Child Mental Health

Child Mental Health: हमारे आस पास लोग अक्सर हेल्थ को केवल फिजिकल हेल्थ (physical health) से जोड़ते है।  आज भी बहुत सी जगह में मेंटल हेल्थ (mental health) को सीरियसली नहीं लेते।यह बहुत जरूरी है। हमें मेंटल हेल्थ और ग्रोथ को सावधानी से समझने की जरूरत है।आज हम आपको बताएंगे कि किस तरह पैरेंट्स अपने बच्चे की मेंटल ग्रोथ को प्रभावित करते हैं।

How do parents influence the mental growth of the child?

1. पैरेंट्स होते है बच्चे का पहला संसार

हमारे आस पास की चीजें जिन्हें हम समझ सकते है। जिस में हम रह रहे है।जिन लोगो को हम पहचानते है हम उसे ही संसार समझते है।यह पूरी तरह सही भी है।जिन चीज़ों को हम पहेचानते नहीं , जिन लोगों  को हम जानते नहीं उनसे हमें क्या मतलब। उसी तरह बच्चे को छोटे से ही अपने माता पिता के अलावा और किसी से ज्यादा लगाव नहीं होता।इसलिए बच्चे का पूरा संसार अपने पैरेंट्स के इर्द गिर्द बसा होता है। उनकी दिनचर्या से बच्चे पर काफी इफेक्ट पड़ता है।

2. पैरेंट्स होते है पहले शिक्षक

यह बात तो हम सर ने बहुत पहले से ही सुन रखी है कि मां अपने बच्चे की पहली शिक्षक होती है। यह बात पूरी तरीके से सही भी है लेकिन केवल मां नहीं बल्कि दोनों ही पेरेंट्स अपने बच्चे के पहले शिक्षक होते हैं। किसी भी स्कूल में जाने से पहले यह किसी भी क्लास में पढ़ने से पहले कोई भी अच्छी है बट लिखने से पहले। बच्चे हर चीज अपने मां बाप से सीखते हैं। 

खाना खाने का ढंग बैठने का ढंग चलने का ढंग यह सब बच्चे अपने मां-बाप से सीखते हैं। उनकी मानसिकता का विकास उनके पेरेंट्स के बिहेवियर पर बहुत ज्यादा डिपेंड करता है।

3. पैरेंट्स से सीखते हैं व्यवहार

यह बात पूरी तरीके से सही है कि बच्चे अपने व्यवहार को मां-बाप से ही सीखते हैं। मां-बाप की दिनचर्या (daily lifestyle) हो सकता है थोड़ी हेक्टिक हो। कभी-कभी ऑफिस या कामकाज में काफी ज्यादा तनाव का सामना करना पड़ता है। अगर आप अपने बच्चे के सामने किसी भी व्यक्ति से तेज आवाज में बात करेंगे या चिल्ला कर बात करेंगे। 

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तो उसे यह लग सकता है, कि किस से बात करने का शायद यही तरीका है।फिर शायद वह भी वैसे ही व्यवहार करना चालू कर दें ।इसलिए हमेशा अपने बच्चों के सामने अच्छे व्यवहार को ही प्रस्तुत करें।

4. सुबकॉन्शस माइंड (subconscious mind) का रखें ख्याल

हम सभी युवा जानते हैं कि हमारा सबकॉन्शियस माइंड काफी ज्यादा ताकतवर होता है। यह बात साइंटिफिकली प्रूवन है कि अगर हमारे सबकॉन्शियस माइंड में कोई आईडिया या फिर कोई विचार उपस्थित है तो हमारा व्यवहार यह हमारा आने वाला फीचर उस पर निर्धारित हो सकता है। उसी तरह छोटे बच्चे के सबकॉन्शियस माइंड का स्कोर काफी अच्छे से ख्याल रखना चाहिए। 

वह कोई ऐसी चीज है ना देखे या फिर कुछ ऐसी चीजों से खुद को ना घेर ले जो उसके लिए सही ना हो। यह चीजें कहीं जाकर उसके सबकॉन्शियस माइंड में ना बैठे जाएं।बच्चे जो देखते है वह उसे अपने में उतार लेते है।

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