क्या लेट नाइट क्रेविंग होना हॉर्मोनल इम्बैलेंस का संकेत हो सकता है?

रात को अचानक कुछ मीठा या नमकीन खाने की क्रेविंग लगना बहुत लोगों को नॉर्मल लगता है। अक्सर इसे स्ट्रेस, बोरियत या दिन भर ठीक से न खाने का नतीजा मान लिया जाता है।

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Dimpy Bhatt
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Could late night cravings be a sign of hormonal imbalance

Photograph: (freepik)

रात को अचानक कुछ मीठा या नमकीन खाने की क्रेविंग लगना बहुत लोगों को नॉर्मल लगता है। अक्सर इसे स्ट्रेस, बोरियत या दिन भर ठीक से न खाने का नतीजा मान लिया जाता है। लेकिन अगर लेट नाइट क्रेविंग बार-बार हो रही है और आप चाहकर भी उसे कंट्रोल नहीं कर पा रहे, तो यह सिर्फ़ आदत नहीं, बल्कि हॉर्मोनल इम्बैलेंस का संकेत भी हो सकता है।

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क्या लेट नाइट क्रेविंग होना हॉर्मोनल इम्बैलेंस का संकेत हो सकता है?

हॉर्मोन और भूख का कनेक्शन

हमारी भूख सिर्फ़ पेट से नहीं, बल्कि हॉर्मोन्स से कंट्रोल होती है। लेप्टिन और घ्रेलिन जैसे हॉर्मोन यह तय करते हैं कि हमें कब भूख लगेगी और कब पेट भरा महसूस होगा। जब ये हॉर्मोन बैलेंस में नहीं रहते, तो बॉडी गलत टाइम पर भूख के सिग्नल भेजने लगता है। इसी वजह से रात के टाइम अननेसेसरी क्रेविंग शुरू हो जाती है।

स्ट्रेस हॉर्मोन भी निभाता है रोल

लेट नाइट क्रेविंग का एक बड़ा कारण स्ट्रेस हॉर्मोन कोर्टिसोल भी हो सकता है। दिन भर का तनाव जब रिलीज़ नहीं होता, तो रात में बॉडी आराम की बजाय एनर्जी ढूंढता है। ऐसे में मीठा या हाई-कार्ब फूड सबसे आसान ऑप्शन लगता है। यह सिर्फ़ आदत नहीं, बल्कि बॉडी का एक तरह का कंफर्ट मेकैनिज़्म होता है।

नींद की कमी और भूख

अगर आपकी नींद पूरी नहीं हो रही, तो हॉर्मोनल इम्बैलेंस की संभावना और बढ़ जाती है। कम नींद लेने से घ्रेलिन बढ़ता है, जो भूख को ट्रिगर करता है, और लेप्टिन कम हो जाता है, जो पेट भरने का सिग्नल देता है। नतीजा—रात को बार-बार कुछ खाने की इच्छा।

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महिलाओं में हॉर्मोनल बदलाव का असर

पीरियड्स, पीएमएस, पीसीओडी या मेनोपॉज़ के दौरान महिलाओं में हॉर्मोनल फ्लक्चुएशन ज्यादा होता है। इस दौरान लेट नाइट क्रेविंग और भी स्ट्रॉन्ग हो सकती है। कई बार बॉडी एनर्जी या न्यूट्रिएंट की कमी को खाने की इच्छा के ज़रिए दिखाता है।

कब हो जाए अलर्ट?

अगर लेट नाइट क्रेविंग के साथ वेट गेन, थकान, मूड स्विंग्स या नींद की प्रॉब्लम भी हो रही है, तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए। यह संकेत हो सकता है कि शरीर अंदर से बैलेंस मांग रहा है। लेट नाइट क्रेविंग हमेशा हॉर्मोनल इम्बैलेंस नहीं होती, लेकिन जब यह लगातार और अनकंट्रोल्ड हो, तो यह एक वार्निंग साइन ज़रूर हो सकती है।

पीरियड्स पीएमएस