मेंटल हेल्थ अलर्ट: महिलाओं में दिखने वाले शुरुआती संकेत जिन्हें इग्नोर न करें

शुरुआती संकेतों को पहचानकर अगर टाइम पर सपोर्ट लिया जाए—चाहे वो दोस्त से बात करना हो, काउंसलिंग हो या प्रोफेशनल मदद—तो बड़ी प्रॉब्लम बनने से रोका जा सकता है।

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Dimpy Bhatt
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Early signs women ignore about mental health

Photograph: (freepik)

महिलाएँ अक्सर अपनी फिज़िकल हेल्थ को लेकर सतर्क रहती हैं, लेकिन जब बात मेंटल हेल्थ की आती है, तो उसे इग्नोर करना आम बात बन चुकी है। घर, करियर, रिश्ते और सोसाइटी की उम्मीदों के बीच महिलाएँ अपनी इमोशंस को “एडजस्टमेंट” समझकर दबा लेती हैं। यही वजह है कि मेंटल हेल्थ से जुड़े शुरुआती संकेत टाइम पर पहचाने नहीं जाते और प्रॉब्लम धीरे-धीरे गहरी हो जाती है।

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मेंटल हेल्थ अलर्ट: महिलाओं में दिखने वाले शुरुआती संकेत जिन्हें इग्नोर न करें

लगातार थकान और मोटिवेशन की कमी

अगर बिना ज़्यादा काम किए भी आपको हर टाइम थकान महसूस होती है, छोटे काम भारी लगने लगे हैं और पहले जो चीज़ें खुशी देती थीं, उनमें अब दिलचस्पी नहीं रही—तो यह सिर्फ़ फिज़िकल एक्सॉशन (physical exhaustion) नहीं हो सकता। यह डिप्रेशन या एंग्जायटी की शुरुआती निशानी भी हो सकती है, जिसे अक्सर महिलाएँ “रूटीन स्ट्रेस” कहकर टाल देती हैं।

मूड स्विंग्स और इमोशनल ओवरफ्लो

अचानक गुस्सा आना, बात-बात पर रो देना या बिना किसी वजह के उदासी महसूस करना—ये सब इमोशनल वीकनेस नहीं हैं। हार्मोनल चेंज, और लगातार स्ट्रेस मिलकर मेंटल बैलेंस को बिगाड़ सकती हैं। जब ये बदलाव लंबे टाइम तक बने रहें, तो इन्हें इग्नोर करना नुकसानदेह हो सकता है।

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नींद और भूख के पैटर्न में बदलाव

मेंटल हेल्थ का असर सबसे पहले नींद और खाने की आदतों पर दिखता है। रात में नींद न आना, बार-बार जागना या ज़रूरत से ज़्यादा सोते रहना—ये संकेत हैं कि दिमाग़ लगातार ओवरलोड में है। इसी तरह बहुत कम या बहुत ज़्यादा खाना भी एक वॉर्निंग साइन हो सकता है।

खुद को ब्लामे देना और कॉन्फिडेंस की कमी

जब महिलाएँ हर छोटी-बड़ी बात के लिए खुद को ज़िम्मेदार ठहराने लगती हैं और अपने फैसलों पर शक करने लगती हैं, तो यह लो सेल्फ-एस्टीम का संकेत हो सकता है। सोसाइटी की “परफेक्ट बनने” की उम्मीदें इस इमोशन को और बढ़ा देती हैं।

सोशल विदड्रॉअल और चुप्पी

अगर कोई महिला धीरे-धीरे लोगों से कटने लगे, बातचीत से बचने लगे या अपने मन की बात शेयर करना बंद कर दे, तो इसे “क्वाइट नेचर” समझकर इग्नोर नहीं करना चाहिए। कई बार यह अंदर चल रही मेन्टल थकान (Mental Fatigue) और अकेलेपन का संकेत होता है।

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क्यों ज़रूरी है टाइम पर मदद लेना

मेंटल हेल्थ की प्रॉब्लम अचानक नहीं होतीं, वे धीरे-धीरे होती हैं। शुरुआती संकेतों को पहचानकर अगर टाइम पर सपोर्ट लिया जाए—चाहे वो दोस्त से बात करना हो, काउंसलिंग हो या प्रोफेशनल मदद—तो बड़ी प्रॉब्लम बनने से रोका जा सकता है।

मेंटल हेल्थ कोई वीकनेस नहीं, बल्कि हेल्थ का उतना ही ज़रूरी हिस्सा है जितना बॉडी।अपनी इनर वौइस् (Inner Voice) सुनना और मदद मांगना—यही असली स्ट्रेंथ है।

मेंटल हेल्थ मूड स्विंग्स