भारत में एबॉर्शन से जुड़ी ऐसी कई बातें हैं जिनके बारे में लोगों को ज़्यादा जानकारी नहीं हैं। इसी साल एबॉर्शन के लीगल पीरियड को बढ़ाया गया हैं। अब किसी भी प्रेगनेंसी को 24 हफ़्तों तक टर्मिनेट किया जा सकता है। एबॉर्शन से जुड़े सारे कायदें और कानून मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेगनेंसी (एमटीपी) एक्ट के तहत बनाए जाते हैं। जानिए एबॉर्शन के कुछ बेसिक फैक्ट्स जो आपको पता होने चाहिए:

1. कौन कर सकता है आपकी प्रेगनेंसी को टर्मिनेट?

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेगनेंसी एक्ट के अनुसार हर कोई प्रेगनेंसी को टर्मिनेट करने के लिए एलिजिबल नहीं हैं। केवल वहीं लोग प्रेगनेंसी को टर्मिनेट कर सकते हैं जिनके पास इंडियन मेडिकल कॉउंसिल के द्वारा एक क्वालिफाइड मेडिकल डिग्री हैं, जिनका नाम स्टेट मेडिकल रजिस्टर में दर्ज हैं या फिर जिनको एमटीपी के रूल्स के हिसाब से गायनेकोलॉजी में ट्रेनिंग प्राप्त है। इनके अलावा अगर कोई एबॉर्शन करता है तो वो एक लीगल क्राइम है।

2. एबॉर्शन के लिए किसकी कंसेंट चाहिए?

एमटीपी एक्ट के अनुसार एबॉर्शन करने के लिए सिर्फ उस महिला की कंसेंट चाहिए जो प्रेग्नेंट है। इसके अलावा अगर कोई माइनर या मानसिक रूप से बीमार महिला का एबॉर्शन हों तो उसके लिए एक गार्डियन की कंसेंट ज़रूरी है।

3. कहाँ हों सकता है एबॉर्शन?

एमटीपी एक्ट के हिसाब से भारत में सभी सरकारी हॉस्पिटल्स एबॉर्शन के लिए एप्रूव्ड और सेफ हैं। इसके अलावा प्राइवेट सेक्टर में एबॉर्शन करवाने के लिए उस मेडिकल सेंटर के पास डिस्ट्रिक्ट लेवल समिति का अप्रूवल होना चाहिए।

4. ये पूरी तरह हेल्थ इंश्योरेंस से कवर हों सकता है

भारत में एबॉर्शन के 100 प्रतिशत एक्सपेंसेस सरकार के हेल्थ इंश्योरेंस द्वारा उठाए जाते हैं। आयुष्मान भारत और एम्पलॉईस स्टेट इंश्योरेंस के तहत इस पूरे पैकेज के अंतर्गत आपको 12000 रूपए मिलने चाहिए। ये आपके कंसल्टेशन, होस्पिटलाइज़ेशन, मेडिकेशन और फॉलो-अप ट्रीटमेंट्स का एक्सपेंस भली भांति उठा सकता हैं।

5. क्या है भारत में एबॉर्शन के स्टेटिस्टिक्स?

भारत में हर साल करीब 1.6 मिलियन अबोरशंस होते हैं। इसमें से काफी ज़्यादा अबोरशंस अनसेफ तरीकों से किए जाते हैं जो मैटरनल मोर्टेलिटी का तीसरा सबसे बड़ा कारण है। हर दिन इसके कारण 10 महिलाओं की मौत हो रही है। इसलिए ये बहुत ज़रूरी है की महिलाओं को सेफ एबॉर्शन के एक्सेस प्रोवाइड किए जाये वरना इस स्तिथि में सुधार नहीं आएगा।

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