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“पौधों के साथ समय बिताना स्ट्रेस को कम कर सकता है “- याशिका बिष्ट

Published by
Ayushi Jain

“पौधों के साथ समय बिताना स्ट्रेस को कम कर सकता है “- यह कहना है होम गार्डनर याशिका बिष्ट का जो बचपन से ही मिट्टी से जुड़ी हुई हैं और गार्डनिंग से उन्हें बहुत लगाव है। यशिका अपनी बालकनी में ही अलग-अलग तरीके से गार्डनिंग करती हैं। आइये जानते है यशिका से गार्डनिंग (gardening hindi) के उनके एक्सपीरियंस के बारे में।

1.आपने गार्डनिंग करना कब शुरू किया?

मैं उत्तराखंड की पहाड़ियों और किसानों के परिवार से हूं और इसी वजह से पौधों और उनके प्रति मेरा प्यार स्वाभाविक रूप से मेरे अंदर शुरुआत से ही था। मैंने बचपन से सब्जियों को उगता और कटता हुआ देखा। सर्दियों में हम लॉन की धूप में खाना खाते हैं। जब मैं अपनी हायर स्टडीज़ के लिए दिल्ली गयी तो पक्षियों के चहकने की आवाज़ को कारों के शोर ने बदल दिया था। एक हॉस्टल में रहते हुए मैं बहुत कुछ नहीं कर सकती थी, लेकिन जब मेरी शादी हुई और मेरे पास मेरी खुद की जगह थी, तो मैंने बालकनी में ही गार्डनिंग शुरू की ।

2 आप गार्डनिंग में कौन – कौन से पौधे उगाती हैं ?

फोलिएज, फ्लोवेरिनंग क्रीपर्स और हर्ब्स मैं सब कुछ उगाती हूँ। मुझे फूलों और पौधों से प्यार है क्योंकि वे नेचुरल पोलिनेटर्स को आकर्षित
करते हैं और यह बायो-डाइवर्सिटी में सपोर्ट करने का एक शानदार तरीका है, जैसे कि हमेलिया फूल सनबर्ड पक्षी और तितलियों को आकर्षित करता है। बोगनविलिया और मधुमालती जैसे लताएं बालकनी को एक बंगलो लुक देते हैं। पुदीना, धनिया और तुलसी आदि अच्छी रसोई की जड़ी-बूटियाँ हैं जो ज्यादा जगह नहीं लेती हैं।

एक बीज से कुछ उगाना या एक बीज से उगाए गए अपने भोजन की कटाई करना एक संतुष्टि और एक उपलब्धि की भावना देता है। यह आत्म विश्वास को बढ़ावा देने में मदद करता है – यशिका बिष्ट

3.आपके अनुसार बाकी लोगों को गार्डनिंग को अपने जीवन का हिस्सा क्यों बनाना चाहिए ?

गार्डनिंग मेरे लिए थेराप्यूटिक (therapeutic) है। कई रिसर्च  से पता चलता है कि पौधों के साथ समय बिताना स्ट्रेस को कम कर सकता है और यह आपकी इम्म्यून सिस्टम को हैल्दी रखने में भी मददगार है। अपने बच्चों को गार्डनिंग में रूचि पैदा करवाने से उन्हें दया, धैर्य को समझने और उनके स्क्रीन टाइम को कम करने में मदद मिल सकती है।

और पढ़ें: “आर्गेनिक फार्मिंग के लिए आपको धैर्य, जुनून और अच्छा ज्ञान चाहिए”- दीपाली शहलोत

  1. गार्डनिंग हमे रोज़मर्रा के जीवन में किस तरह से मदद करती है?

एक बीज से कुछ उगाना या एक बीज से उगाए गए अपने भोजन की कटाई करना एक संतुष्टि और एक उपलब्धि की भावना देता है। यह आत्म विश्वास को बढ़ावा देने में मदद करता है.

  1. आपका लॉक डाउन में गार्डनिंग का अनुभव कैसा रहा ?

लॉकडाउन ने मुझे अपने पौधों के साथ बहुत समय दिया, मैंने अपने रसोई घर में उपलब्ध बीजों से बहुत सी किचन गार्डनिंग की, जैसे कि मस्टर्ड, धनिया, ब्लैक ग्राम आदि। लॉकडाउन के कारण, कोई समय की कोई कमी नहीं थी और मैंने इसका पूरा मज़ा लिया।

6.क्या गार्डनिंग करने के लिए हमे किसी हाई इन्वेस्टमेंट या हेल्प की ज़रूरत है या कोई भी आसानी से गार्डनिंग कर सकता है ?

गार्डनिंग करने के लिए आपको बस कुछ रिसर्च करने की जरूरत है और अपने बेसिक्स को सही से प्राप्त करें। अपने घर और उसके एनवायरनमेंट, लाइट, टेम्परेचर आदि को समझें और आपको पता चल जाएगा कि कौन से पौधों को अंदर लगाना है। और फिर आपको मिट्टी, कंटेनर, कुछ गाडेनिंग टूल्स, बीज और पौधों की आवश्यकता है। गार्डनिंग के लिए किसी बड़े इन्वेस्टमेंट की आवश्यकता नहीं है।

और पढ़ें: हमें अपने जीना का तरीका बदलना चाहिए – आर्गेनिक फार्मर कल्पना मनिवान्नं

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