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Photograph: (Pinterest)
मेंटली स्ट्रॉन्ग होना सिर्फ मुश्किल टाइम में न रोना नहीं है। असली मेन्टल स्ट्रेंथ का मतलब है इमोशंस को समझना, चैलेंजेज को फेस करना और फेलियर से सीखना। अगर आप जानना चाहते हैं कि आप सच में मेंटली स्ट्रॉन्ग हैं या नहीं, तो इन 5 संकेतों से खुद को परख सकते हैं।
क्या आप सच में मेंटली स्ट्रॉन्ग हैं? इन 5 संकेतों से करें खुद की पहचान
1. आप अपनी इमोशन को एक्सेप्ट करते हैं
मेंटली स्ट्रॉन्ग लोग अपने इमोशन को दबाते नहीं, बल्कि उन्हें समझते और एक्सेप्ट करते हैं। दुख, गुस्सा या डिसअप्पोइंटेड महसूस करना वीकनेस नहीं है। फर्क सिर्फ इतना है कि आप इन इमोशन को अपने डिसिशन पर हावी नहीं होने देते। आप खुद से ऑनेस्ट रहते हैं और जरूरत पड़ने पर मदद लेने में भी हिचकिचाते नहीं।
2. फेलियर से डरते नहीं, सीखते हैं
मिस्टेक या फेलियर लाइफ का हिस्सा है। मेंटली स्ट्रांग व्यक्ति फेलियर को अपनी पहचान नहीं बनाता। वह सोचता है — “मैंने क्या सीखा?” न कि “लोग क्या सोचेंगे?” हर सेटबैक को एक एक्सपीरियंस मानकर आगे बढ़ना ही असली ताकत है।
3. आप ‘ना’ कहने की हिम्मत रखते हैं
हर किसी को खुश करने की कोशिश करना मेन्टल थकान बढ़ा सकता है। मेंटली स्ट्रॉन्ग लोग अपनी बौंडरीएस सेट करते हैं और जरूरत पड़ने पर साफ शब्दों में ‘ना’ कह देते हैं। वो जानते हैं कि अपनी शांति और प्रिऑरिटीज़ को प्रोटेक्ट करना जरूरी है।
4. आप तुलना में नहीं उलझते
सोशल मीडिया के दौर में खुद को दूसरों से कंपेर करना आसान है। लेकिन मेंटली स्ट्रांग लोग अपनी जर्नी पर ध्यान देता है। वो दूसरों की सक्सेस से इंस्पिरशन लेता है, जेएलओसी नहीं। उन्हें पता होता है कि हर किसी की पेस और पथ अलग है।
5. डिफिकल्ट सिचुएशन में भी बैलेंस बनाए रखते हैं
चैलेंजेज लाइफ का हिस्सा हैं। फर्क सिर्फ ये है कि आप उन पर कैसे रियेक्ट करते हैं। अगर आप स्ट्रेस्फुल सिचुएशन में भी सोच-समझकर डिसिशन लेते हैं और पैनिक के बजाय सलूशन ढूंढ़ते हैं, तो ये मेन्टल स्ट्रेंथ का संकेत है। छोटी-छोटी हैबिट्स, सेल्फ रिफ्लेक्शन और पॉजिटिव थिंकिंग से इसे डेवेलोप किया जा सकता है।
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