हमारे समाज में परफेक्ट वूमन की एक डेफिनेशन है ,जो उस डेफिनेशन के हिसाब से चलता है उसे समाज पसंद करता है ,वो एक ‘likeable woman’ कहलाती है। सवाल ये है कि औरतें किसी के हिसाब से क्यों चले ,वो अपनी मर्ज़ी से क्यों नहीं जी सकती , क्यों औरतो को सिर्फ़ वही काम करना चाहिए जो समाज को पसंद आये, वो अपनी पसंद से कोई काम क्यों नहीं कर सकती? सोसाइटी की इस “likeable ” की डेफिनेशन को समझने के लिए हमने बात की मल्लिका दुआ से। मल्लिका दुआ अपनी ऑन -पोंइट कॉमिक टाइमिंग के लिए जानी जाती है। ये एक इंडियन एक्टर ,कॉमेडियन और राइटर है ,जो अपनी बातो से इस समाज को आईना दिखाने का काम करती है।

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अगर आप खुदको एक्सप्रेस करती है तो आप सोसाइटी के लिए “difficult” हो – मल्लिका दुआ

मल्लिका दुआ ने अपने इंडस्ट्री के एक्सपीरियंस शेयर करते हुए कहा कि “likeable woman” की डेफिनेशन हमारे समाज में बहुत अलग है। अगर आप अपना पॉइंट ऑफ़ व्यू एक्सप्रेस करते हो तो आप likeable woman की कैटेगरी में नहीं आते ,तब आप ‘difficult’ कहलाती है। बचपन से मैंने इसे फेस किया है ,इसलिए अब मुझे आदत सी गई है। मैं ऐसे लोगो को मुस्कुरा के इगनोर करती हूँ ,और अपना पॉइंट रखती हूँ।”

जब हमने मल्लिका से पूछा ,क्या कभी वो किसी विषय पर अपनी बात रखने से पहले अपने फॉलोवर्स के रिस्पांस के बारे में सोचती है? उन्होंने बड़ी ही बेबाक़ी से बताया है कि “वैसे तो मैं इस बारे में नहीं सोचती , मेरे दिल में जो आता है मैं बोल देती हूँ। मुझे फ़र्क नहीं पड़ता कोई मेरे बारे में क्या सोचता है ,अगर आपको मेरी बात पसंद नहीं आती तो आप मुझे मत सुनिए। लेकिन हां, मुझे पता है लोग मेरी वीडियो मूड फ्रेश करने के लिए देखते है ,फन के लिए देखते है , तो मैं कोशिश करती हूँ के उनको निराश न करू।“

मल्लिका दुआ ट्रॉल्स को इस तरह करती है हैंडल

अब इंटरनेट का ज़माना है ,लोग एक अकाउंट के पीछे छुप के किसी को भी ट्रोल करते है और परेशान करते है। अगर आप फेमस है ,सेलिब्रिटी है तो आपको ट्रॉल्स का सामना ज़रूर करना पड़ेगा। मल्लिका दुआ जो खासतौर पर एक फीमेल कॉमेडियन के नाम से जानी जाती है ,उन्हें अपने कंटेंट के लिए काफी ट्रोल किया जाता है। मल्लिका ने बताया कि वो इन ट्रॉल्स को कैसे हैंडल करती है “ट्रोल का सामना दोनों जेंडर को करना पड़ता है। ट्रोल से निपटने का सबसे आसान तरीका है उन्हें ब्लॉक करना ,इसके अलावा अगर मुझे लगता है कि इसको तो मैं सुना के रहूंगी तो मैं उसे सुना देती हूँ। अगर ये इशू ज़्यादा सीरियस हो जाये तो कानून की मदद लेना सही होता है ,अगर ज्यादा बड़ा मैटर नहीं है तो इसके लिए हमारे पास कॉल आउट कल्चर है , कैंसिल कल्चर है। इन सबको फॉलो कर के मैं इन ट्रॉल्स से बड़ी ही हिम्मत से लड़ती हूँ।”

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