अगर समाज, शादी को केवल दो लोगों के बीच बने खूबसूरत रिश्ते की परिभाषा तक सीमित रखेगा, तो चीज़े कितनी सुधरी नज़र आएंगी। मगर शादी को कई शर्तों से बांधना, इस रिश्ते की खूबसूरती को कहीं पीछे छोड़ देता है।

एक तय उम्र से, लड़कियों से यह उम्मीद की जाती है कि वो ऐसे खाएंगी, ऐसे बात करेंगी और ऐसे बैठेंगी। और ऐसे व्यवहार का कारण, यह निकलता है कि कल लड़कियों को ससुराल जाना पड़ेगा; तो उन्हें सारी चीज़े पता होनी चाहिए। हर बच्चे को अच्छा व्यवहार सिखाना जरूरी है।  मगर लड़कियों के लिए यह सब, सिर्फ शादी के लिए करना और उनके दिमाग में कम उम्र से ही शादी का एक बोझ रखना बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं हैं।

लड़कियों को नई-नई चीज़े सिखाने का कारण यदि बाद में होने वाली उनकी शादी बन जाए, तो हम एक खोखले कल की नींव रख रहें है। जिसमे बेटियाँ आज खुद को छोड़ के, अपने धुंधले कल को सवार रही हैं।

मसाबा गुप्ता के शादी पर विचार

शादी की इन तमाम परिभाषाओं के संदर्भ में, जब हमनें जानी-मानी फैशन डिजाइनर और अभिनेत्री मसाबा गुप्ता से बात की तो उनका कहना था – “मैं समझती हूँ, शादी करने से आने वाले कल के लिए हमें एक पार्टनर मिल जाता है जिसके साथ हम अपनी उम्र गुज़ार सकते हैं। मगर शादी को, एक-दूसरे को बांधने के लिए इस्तेमाल करना गलत है।”

मसाबा शादी के रिश्ते में सम्मान की बात करते हुए कहती है कि – “शादी में एक चीज़ जो सबसे जरूरी है वो है ‘सम्मान’, अगर रिश्ते में आपको सम्मान मिलता है तो आप उसमें बिना जिझक के आगे बढ़े वरना रिश्ते को आगे ले जाने में कोई फायदा नहीं। यह जरूरी भी है कि शादी के बाद एक-दूसरे का  सम्मान बना रहें, वरना रिश्तों का महत्व खत्म हो जाएगा और वह अपना मूल खो देगा। शादी को तमाम शर्तों से बचाने की गुहार लगाती हुई मसाबा आगे कहती है कि – “अपना बच्चा चाहने के लिए, शादी जरूरी नहीं, आप जिस ढंग से रिश्ते में खुश है वैसे रहें।”

शादी को तमाम शर्तों से मुक्त करना, आज की एक मुख्य जरूरत है। इस बंधन को जब तक बंधनों से मुक्त और अलग रखा जाएगा, तब तक इसकी खूबसूरती बनी रहेगी।

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