पहली बार ऐसा कोई बिल आया है जिस में उन महिलाओं के लिए बात की गयी है जिन की शादी नहीं हुई है। इस में महिलाएं बिना शादी के भी बच्चा गिरा सकती हैं यानि एबॉर्शन करा सकती हैं। ये बिल राज्य सभा और लोक सभा में पास कर दिया गया है। इस बिल को सभी जगह के हालात देख कर और स्टडीज कर के लाया गया है। आइए जानते हैं प्रेगनेंसी का मेडिकल टर्मिनेशन महिलाओं के हित में क्यों है –

कई महिलाएं ऐसी होती हैं जो बच्चा नहीं चाहती हैं पर कुछ कारणों से वो गर्भवती हो जाती हैं ऐसे में उनको बच्चे के लिए मजबूर करना गलत है । इसलिए ये लॉ उन महिलाओं के लिए बहुत अच्छा है।

ये बिल महिलाओं के हक़ में है। जानिए इस बिल के मुताबित क्या क्या बदलाव आए हैं –

1. इस बिल में स्पेशल केस की महिलाओं को बिल 24 हफ्ते से पहले एबॉर्शन की परमिशन देता है। इस से पहले ये टाइम 20 हफ्ते का था।

2.यह बिल 1971 के ” मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेगनेंसी एक्ट, 1971 ” को संशोधित कर के आया है।

3. इस बिल के मुताबित डॉक्टर की सलाह से आप 20 हफ्ते से पहले एबॉर्शन करा सकते हैं और स्पेशल केस में आप 2 मेडिकल प्रैक्टिशनर की सलाह से 24 हफ्ते से पहले करा सकते हैं।

4. बिल के मुताबित महिला का नाम और अन्य जानकारी रिवील नहीं होनी चाइए ऐसा होने पर सजा भी मिल सकती है।

5. एबॉर्शन कराने वाली महिला का नाम और अन्य जानकारी सिर्फ उन्ही को दी जा सकती है जिन्हें लॉ से परमिशन दी गयी है किसी केस के चलते या किसी कंडीशन के होने पर।

6. स्पेशल केटेगरी में रेप पीड़ित महिलाएं, माइनर और डिफरेंटली एबल्ड महिलाएं आती हैं।

7. अगर आप की प्रेगनेंसी 24 हफ्ते से ऊपर जा चुकी है और बच्चे में कुछ खराबी है तो मेडिकल बोर्ड से कंसल्टेशन कर के आप एबॉर्शन करा सकते हैं।

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