मिसकैरेज क्यों होता हैं?

Published by
Yasmin Ansari

मिसकैरेज क्यों होता हैं?

मिसकैरेज (Miscarriage) जिसे हिंदी में गर्भपात भी कहते है। यह एक ऐसी दुखद समस्या है जो लगभग 20 प्रेगनेंट औरतो में से 5 को होती है।मिसकैरेज क्यों होता हैं? इस सवाल का कोई फिक्स जवाब नहीं हैं। मिसकैरेज तब होता है जब प्रेगनेंसी के 20 वें हफ्ते से पहले भ्रूण (embryo) की मृत्यु हो जाती है। मिसकैरेज आमतौर पर आपकी प्रेगनेंसी में जल्दी होता है – रिसर्च के अनुसार 10 में से 8 मिसकैरेज पहले 3 महीनों में होते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान मिसकैरेज आम बात है लेकिन ये टाइम माँ के लिए सबसे मुश्किल होता है। प्रेगनेंसी खोने का दुख और काफी मानसिक तकलीफ देता है। मिसकैरेज को मेडिकल भाषा में त्वरित गर्भपात (spontaneous abortion) कहा जाता है।

मिसकैरेज के कारण :

मिसकैरेज का कारण जानना मुश्किल होता हैं। इसके लिए कोई सटीक कारण नहीं बताया जा सकता लेकिन निम्नलिखित कारण काफ़ी मायने में इम्पोर्टेन्ट हैं –

  • शराब पीना।
  • बीमारी का होना।
  • संक्रमण का होना।
  • कैफीन का अधिक मात्रा में सेवन करना।
  • क्रोमोसाम का होना।
  • दवाईयों का सेवन करना।

मिसकैरेज के प्रकार :

  1. थ्रीटेनेड मिसकैरेज (Threatened Miscarriage) – थ्रीटेनेड मिसकैरेज का मतलब ऐसी सिचुएशन से है, जिसमें वजाइनल ब्लीडिंग होती है। यह प्रॉब्लम ज्यादातर प्रेगनेंसी के फर्स्ट ट्रिमस्टर के दौरान होती है और इसमें सर्विक्स बंद हो जाती है।
  2. इनएविटेबल मिसकैरेज (Inevitable Miscarriage) – अर्ली प्रेगनेंसी के दौरान अगर वजाइनल ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो तो और पेट में तेज़ ऐंठन (क्रैम्प्स ) होती है, तो उसे इनएविटेल मिसकैरेज कहा जाता है।
  3. कम्पलीट मिसकैरेज (Complete Miscarriage) कम्पलीट मिसकैरेज से तात्पर्य ऐसे मिसकैरेज से है, जिसमें यूट्रस से सभी टिशू बाहर निकल जाते हैं।कम्पलीट मिसकैरेज की सिचुएशन में पेट में ज्यादा दर्द, हैवी वैजिनल ब्लीडिंग, और प्रेगनेंसी टिश्यूज़ के पूरी तरह से बाहर निकलने जैसी प्रोब्लेम्स होती है।
  4. इनकम्पलीट मिसकैरेज (Incomplete Miscarriage) कम्पलीट मिसकैरेज की तरह इनकम्पलीट मिसकैरेज के दौरान भी ज्यादा मात्रा में वजाइनल ब्लीडिंग और दर्द होता है।कुछ प्रेगनेंसी टिश्यूज़ यूट्रस से बाहर आ जाते है और कुछ अंदर ही रह जाते है।
  5. मिस्ड मिसकैरेज (Missed Miscarriage) जब प्रेगनेंसी के दौरान भ्रूण (fetus) नष्ट हो जाता है, लेकिन इसके बावजूद टिश्यूज़ मां के गर्भ में मौजूद रहते हैं, तो इस सिचुएशन को मिस्ड मिसकैरेज कहते है।
  6. रिकरंट मिसकैरेज (Recurrent Miscarriage) जब किसी प्रेगनेंट महिला में तीन या उससे ज्यादा बार मिसकैरेज की घटना होती है, उसे रिकरंट मिसकैरेज कहा जाता ह। रिकरंट मिसकैरेज की समस्या बहुत कम महिलाओं में देखने को मिलती है।
  7. फ़र्स्टट्राइमेस्टर मेंस्ट्रुएशन (First-Trimester Miscarriage) जब प्रेगनेंसी के फर्स्ट ट्राइमेस्टर के दौरान ही एबॉर्शन हो जाता है, तो उसे फ़र्स्ट-ट्राइमेस्टर मेंस्ट्रुएशन कहा जाता है।रिसर्च के अकॉर्डिंग लगभग 80 प्रतिशत मिसकैरेज फ़र्स्ट-ट्राइमेस्टर के आस-पास ही होते हैं।इस प्रॉब्लम में वजाइनल ब्लीडिंग , पीठ के नीचे के एरिया में क्रैम्प्स होते हैं।

मिसकैरेज का इलाज:

मिसकैरेज के इलाज में वही ट्रीटमेंट और मेडिसिन यूज़ की जाती हैं जो एबॉर्शन के लिए यूज़ होती हैं। मिसकैरेज से बचने के लिए प्रग्नेंट महिला को पौष्टिक खाना और एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसके अलावा ज़्यादा सीरियस सिचुएशन में सर्जरी करना सबसे बेहतर होता हैं।

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