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जानिए मेंस्ट्रुअल कप क्या है? इसका सही इस्तेमाल कैसे करें?

Published by
Garima Singh

देखा जाए तो इंडिया में पिरियड्स के दिनों में ज्यादातर सैनिटरी पैड का ही इस्तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन पैड के अलावा मेंस्ट्रुअल कप (menstrual cup) और tampons का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। मेंस्ट्रुअल कप पैड से मुकाबले ज्यादा सस्ते, किफायती और इको फ्रेंडली होते है। लेकिन क्या इनका इस्तेमाल आसान होगा? क्या सच में यह पैड से ज्यादा कम्फर्ट देगा?  जानिए मेंस्ट्रुअल कप क्या है और इसका सही इस्तेमाल कैसे करें

चलिये जानते हैं मेंस्ट्रुअल कप क्या है?

यह सिलिकॉन या लेटेक्स से बना कप है जिसका इस्तेमाल पीरियड के दौरान किया जाता है। इसे vagina  में लगाया जाता है जिससे पीरियड के दौरान निकलने वाले खून को इस कप में जमा किया जा सके। 

ये कप अलग अलग साइज़ में आते हैं और आपको अपनी vagina और cervix के अनुसार सही साइज़ का कप चुन सकती हैं।

मेंस्ट्रुअल कप का साइज़ कैसे चुनें

  • मेंस्ट्रुअल कप के साइज़ को लेकर ज्यादा ध्यान देना चाहिये क्योंकि गलत साइज़ का कप लगाने से लीकेज का डर बना रहेगा।
  • मेंस्ट्रुअल कप का साइज़ आपकी उम्र, cervix की लेंथ और पीरियड के फ्लो पर डिपेंड करता है।
  • अगर आप पहली बार कप का इस्तेमाल कर रही हैं तो पहले सही साइज़ जानने के लिए अपने gynocologist से जरूर सलाह ले लीजिये।
  • इन्हें आप नजदीकी दुकान से खरीद लें या Online Order भी कर सकती हैं।

मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल कैसे करें

  • मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल करने के लिये सबसे पहले आप अपने हाथों को साबुन से धो लीजिये।
  • उसके बाद मेंस्ट्रुअल कप को थोड़ा सा मोड़ें (V shape) और फिर vagina के अंदर डालें।
  • कप जब vagina के अंदर चला जाए तो इसे हल्का सा घुमाएँ जिससे यह अच्छी तरह फिट हो जाए। सही तरीके से फिट होने के बाद इससे जरा भी लीकेज नहीं होता है।
  • कप को निकालना भी आसान है। सबसे पहले अपने हाथों को अच्छी तरह साफ़ कर लें। इसके बाद तर्जनी ऊँगली और अंगूठे को vagina के अंदर डालें और कप के एक सिरे को पकड़ कर धीरे धीरे तब तक खींचें जब तक आप उसके आखिरी सिरे तक ना पहुंच जाएं। उसके बाद इसे बाहर खींच लें।
  • इस तरह यह आसानी से बाहर निकल जाता है। उसके बाद कप में जमा हुए खून को फेंक कर उसे अच्छी तरह गर्म पानी में स्टेरलाइज़ (sterilize) कर लीजिये।

मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल करने के फायदे

  • यह इको फ्रेंडली होते है और पैड के मुकाबले इनका इस्तेमाल काफी आसान है ।
  • लीकेज का डर बिल्कुल नहीं रहता।
  • अधिक फ्लो होने पर भी आप इन्हें 9-10 घन्टों तक पहने रख सकती हैं और अगर फ़्लो नॉर्मल हो तो 12 घंटों तक भी लगाये रख सकती हैं।
  • यह सैनिटरी पैड के मुकाबले काफी सस्ते होते है। एक कप आप 350-500 में खरीद कर इन्हे कई साल तक यूज़ कर सकती हैं।
  • सैनिटरी नैपकिन या टैम्पोन में डायोक्सिन (Dioxyine) और ब्लीच(Bleach) जैसे केमिकल होते है जबकि मेंस्ट्रुअल कप को बनाने में किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता।

तो अब हमें मेंस्ट्रुअल कप के बारें में काफी सारी बातें जान ली है। अगर आप भी फैसला कर रही हैं पैड से कप में चेंज करने तो झिझकें नहीं। यह काफी आसान है और बेहद comfortable भी। 

और भी जानकारी लेने के लिये अपने gynaecologist से जरुर बात कर लें।

पढ़िए : एंडोमेट्रियोसिस क्या है? जानिए इसके लक्षण और कारण

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