पीरियड्स के दिनों मे बिना किसी चिंता के लड़कियों को दौड़ते और खेलते-कूदते, आपने बहुत से पैड्स के ऐड देखे होंगे। और निसंदेह ही, महिलाओ ने पैड्स इस्तेमाल भी किए होंगे। पुराने समय से ही पैड्स का प्रचलन है। समय के साथ जैसे-जैसे तकनीके बदली, हर क्षेत्र में इसका असर साफ दिखा। पीरियड्स में काम आने  वाली चीजों की वैराइटी में तेजी आई और इसी कड़ी मे एक नाम जुड़ा मेंस्ट्रुअल कप का। आज युवतियों में इसका इस्तेमाल बहुत आम है।

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मेंस्ट्रुअल कप्स की कुछ ऐसी  ख़ासियते, जो आपको पता होनी चाहिए

  • पैड्स में लगा ब्लड लंबे समय तक वजाइना के आप-पास लगा रहता है, लेकिन मेंस्ट्रुअल कप्स में ऐसा नहीं होता। इसमें ब्लड कप में इकठ्ठा होता रहता है, जिस वजह से कभी भी TSS (टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम) नहीं होता। TSS एक रेयर बैक्टिरियल बीमारी है, जो लंबे समय तक गीले नैपकीन को इस्तेमाल करने से होती है।
  • पैड्स के साथ महिलाये पीरियड्स के दौरान स्विमिंग और अन्य पानी से जुड़ी ऐक्टिविटी नहीं कर पाती। मगर मेंस्ट्रुअल कप्स इस मामले में पूरी सुरक्षा देता है और साथ ही ये बेहद आरामदायक साबित होते है। मेंस्ट्रुअल कप्स को 12 घंटे तक बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।
  • इस्तेमाल हो चुके, पैड्स के कारण पर्यावरण को बहुत नुकसान झेलना पड़ता है। मगर मेंस्ट्रुअल कप्स ‘reusable’ होते है। बस, ध्यान रहे की मेंस्ट्रुअल कप्स को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले, उसे गर्म पानी से अच्छे से धोया जाए। और एक व्यक्ति का मेंस्ट्रुअल कप कोई दूसरा बिल्कुल इस्तेमाल ना करे। इसके साथ-ही  ये पैड्स से काफ़ी सस्ते भी पड़ते है।
  • पैड्स के कारण, महिलाये अपने पीरियड्स के दिनों मे उन जगहों पर गीला-गीला और असहज महसूस करती है, मगर मेंस्ट्रुअल कप्स आपको ऐसा महसूस नहीं होने देते।

मेंस्ट्रुअल कप्स का कैसे करना है इस्तेमाल

मेंस्ट्रुअल कप्स को इस्तेमाल करना बेहद आसान है। इसे पहले सी-शेप में फोल्ड करना पड़ता है और फिर वजाइना में इन्सर्ट। इसे लगाते ही ये अपनेआप वजाइना की बाहरी लेयर में फिट हो जाता है। यानी ये वजाइना को पूरी तरह-से सील कर देता है। इसे लगाने के बाद हल्का घुमाकर यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए, कि ये अच्छे से लगा है या नहीं।

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