Pausha Putrada Ekadashi 2023: पौष पुत्रदा एकादशी व्रत, जानें पूजा विधि और महत्व

Pausha Putrada Ekadashi 2023: पौष पुत्रदा एकादशी व्रत, जानें पूजा विधि और महत्व। जानिए कब रखा जाएगा यह व्रत क्या है शुभ मुहूर्त आज के इस ब्लॉग में-

Vaishali Garg
29 Dec 2022
Pausha Putrada Ekadashi 2023: पौष पुत्रदा एकादशी व्रत, जानें पूजा विधि और महत्व

Pausha Putrada Ekadashi 2023

Pausha Putrada Ekadashi 2023: धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक यदि कोई व्यक्ती इस व्रत को नियम और विधि-विधान से करता है, तो जल्द ही उसे संतान सुख की प्राप्ति होती। साथ ही इस व्रत को करने वालों के बच्चों का स्वास्थ्य भी सदैव अच्छा बना रहता है। इसके अलावा लंबे समय से रुके हुए कार्य की पूर्ति भी होती है।

Pausha Putrada Ekadashi 2023: पौष पुत्रदा एकादशी व्रत शुभ मुहूर्त

उदयातिथि के मुताबिक, पौष पुत्रदा एकादशी नए वर्ष में 2 जनवरी 2023 को मनाई जाएगी। पौष पुत्रदा एकादशी की शुरुआत 1 जनवरी 2023 को शाम 7 बजकर 11 मिनट पर होगी और खत्म 2 जनवरी 2023 को शाम 8 बजकर 25 मिनट पर होगा। पौष पुत्रदा एकादशी का पारण 3 जनवरी 2023 को सुबह 7 बजकर 12 मिनट से 9 बजकर 25 मिनट तक रहेगा।

Pausha Putrada Ekadashi 2023: पौष पुत्रदा एकादशी 2023 शुभ योग

हिंदू पंचांग के मुताबिक, 2 जनवरी 2023 को पौष पुत्रदा एकादशी पर सिद्ध, साध्य, रवि तीन शुभ योग बन रहे हैं। इन योग में पूजा का बहुत  फल मिलता है।  5 जनवरी को व्रत तोड़ने का समय - 7:12 ए एम से 9:25 ए एम पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - 10:01 पी एम है।

Pausha Putrada Ekadashi 2023: पौष पुत्रदा एकादशी पूजन विधि

पौष पुत्रदा एकादशी के दिन विष्णु जी की पूजा की जाती है। यह व्रत रखने से एक दिन पहले लोगों को सात्विक खाना खाना चाहिए। इसके अलावा आपको बता दें की व्रती महिला या पुरुष को संयमित और ब्रह्मचर्य का भी पालन करना चाहिए। आगले दिन व्रत शुरू करने के लिए सुबह उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प ले, और भगवान विष्णु का ध्यान करें। गंगाजल, तुलसीदल, फूल, पंचामृत से भगवान विष्णु की पूजा करें। पुत्रदा एकादर्शी का व्रत रखने वाली महिला या पुरुष निर्जला व्रत करें। यदि आपकी तबियत ठीक नहीं है, तो शाम को दीया जलाने के बाद आप फलाहार कर सकते हैं। व्रत के दूसरे दिन द्वादशी पर किसी ब्राह्मण व्यक्ति या फिर किसी जरूरतमंद को खाना खिलाएं और उसे दान दक्षिणा दें। उसके बाद ही व्रत का पारण करें।

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