हमारे देश में सेक्स एजुकेशन के नाम पर आदमियों को ज़्यादा कुछ नॉलेज नहीं दी जाती है। बहुत सारे मर्दों को तो पीरियड्स और प्रेगनेंसी से जुड़ी बातें तब पता चलती है जब या तो उनकी शादी हो जाती है या वो पिता बनने वाले होते हैं। जिनको पहले से इस बारे में जानकारी होती है वो भी सम्पूर्ण नहीं होती है और इसलिए कई बार मर्द पीरियड्स से रिलेटेड ऐसा कुछ कह या कर देते हैं जिससे महिलाओं को बहुत तकलीफ पहुँचती है। जानिए पीरियड्स से जुड़ी ये बातें जो हर आदमी को पता होनी चाहिए:

1. क्या है पीरियड्स?

अगर अभी तक आपको पता नहीं है तो जान लीजिए की पीरियड्स का मतलब है वो समय जब एक लड़की की यूटेरस लाइनिंग शेड होती है हर महीने। यूटेरस की इनर लाइनिंग जिसे हम एंडोमेट्रियम कहते हैं हर मेंस्ट्रुअल साइकिल में फर्टीलिज़ेड एग के लिए जगह बनाता है। जब फर्टिलाइजेशन नहीं होता है तो आम तौर पर 28 दिन बाद ये लाइनिंग शेड होती है जिसके बदले में लड़कियों के शरीर से ब्लड फ्लो होता है। आम तौर पर पीरियड्स का लेंथ 3 से 5 दिन का होता है।

2. क्रैम्प्स बहुत भयानक होते हैं

जब एक लड़की अपने पीरियड्स पे होती है तो एक प्रोस्टाग्लैंडीन नामक हॉर्मोन उसकी बॉडी में सेक्रीट होता है जो यूटेरस को एक्सपैंड करने में मदद करता है ताकि वो अच्छे से अपनी लाइनिंग शेड कर सके। इस कारण लगभग हर लड़की कभी ना कभी क्रैम्प्स से ज़रूर गुज़रती है।हर आदमी को इसकी जानकारी की क्रैम्प्स बहुत दर्दनाक होते हैं। इसलिए अगर आपके आस पास कोई लड़की क्रैम्प्स से गुज़र रही हो तो कोशिश करिए की आप उसको हॉट वाटर बैग ला कर दे पाएं।

3. लड़कियां पीरियड्स में प्रेग्नेंट हो सकती है

एक लड़की के प्रेग्नेंट होने की टेन्डेन्सी सबसे ज़्यादा डिपेंड करती है उसके ओवुलेशन साइकिल पे और ना की पीरियड्स के डेट पे। ओवुलेशन हर लड़की के पीरियड्स के एन्ड के बाद होता है। इसलिए जिसकी पीरियड लेंथ छोटी है उसकी ओवुलेशन साइकिल जल्दी शुरू हो जाती है और उसके प्रेग्नेंट होने की सम्भावना बढ़ जाती है। इसलिए अगर आप पीरियड्स के दौरान अनप्रोटेक्टेड सेक्स के बारे में सोच रहे हैं तो सावधान हो जाइए।

4. प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम दर्दनाक होता है

प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम सच में होता है। ये आम तौर पर पीरियड्स स्टार्ट होने के 10 दिन पहले शुरू हो जाता है और जैसे-जैसे हमारे शरीर में रिप्रोडक्टिव होर्मोनेस एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन फ्लक्चुएट करता है हमारे मूड स्विंग्स और इर्रिटेशन लेवल में भी इजाफा होता है। इसके कारण एक लड़की को फ़ूड क्रेविंग्स, मूड स्विंग्स, एंग्जायटी और कभी कभी क्रैम्प्स का भी सामना करना पड़ता है।

5. स्पॉटिंग और पीरियड्स एक नहीं है

आम तौर पर एक लड़की को स्पॉटिंग या तो प्रेगनेंसी के शुरुवात में होती है या फिर मिसकैरिज के वक़्त होती है। आदमियों को ये जानना ज़रूरी है की स्पॉटिंग और पीरियड्स एक चीज़ नहीं है। स्पॉटिंग काफी लाइट होता है और ये पीरियड्स से बिलकुल अलग कॉन्टेक्स्ट में होता है। इसलिए इन दोनों में कंफ्यूज होने की भूल ना करें।

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