हम 21वीं सदी में रह रहे हैं, फिर भी आज भी कई ऐसी चीजें हैं जिनके बारे में हम खुलकर बात नहीं कर पाते, जैसे कि सेक्स या पीरियड्स, आदि। चलिए देखते हैं कुछ ऐसे पॉइंट्स जिनकी हेल्प से आप पीरियड्स को नॉर्मलाईज़ कर पाएंगे

1- पीरियड्स को बाकी की सभी बायोलॉजिकल प्रोसेसेज की तरह ट्रीट करना-

हमारे शरीर में बहुत सी ऐसी प्रोसेसेज होती हैं जो की नॉर्मल हैं, जैसे साँस लेना,पलकें झपकना। उन्हीं में से एक है पीरियड्स। तो हम इनको एब्नॉर्मल चीज़ की तरह क्यों ट्रीट करते हैं?

2- मेंस्ट्रुअल पैड्स को दूसरों से ना छुपाना-

अक्सर दुकान में जब भी हम पैड लेने जाते हैं, दुकानदार हमें उसको या तो अखबार या काली पॉलिथीन में लपेट के देते हैं। ये बिल्कुल भी सही नहीं है, ऐसा ना हमें ख़ुद करना है, और ना किसी दूसरे को करने देना है।

3- माँ के अलावा पापा से भी पीरियड्स के बारे में खुलके बात करना-

हम अपने पेरेंट्स के बहुत करीब होते हैं। दिन भर में होने वाली सारी बातें हम उनसे शेयर करते हैं। पर बात जब पीरियड्स के बारे में बात करने की होती है, तो हम पापा के साथ उतने कम्फ़र्टेबल नहीं होते जितना माँ के साथ। इस चीज़ में सुधार लाने की ज़रूरत है। पापा से भी इस बारे में खुलकर बात करना ज़रूरी है।

4- 12-14 साल के बच्चों के पीरियड्स के बारे में बताना

ये उम्र का एक ऐसा टाइम होता है जब हम प्यूबर्टी की तरफ़ बढ़ रहे होते हैं। ऐसे में अगर बच्चों, चाहे वो लड़का हो या लड़की, को पीरियड्स के बारे में डिटेल में बताएंगे, तो वो आगे चलकर इसको नार्मल की तरह ही ट्रीट करेंगे।

5- पीरियड्स के बारे में कोई भी इनअप्प्रोप्रिएट बात को या मज़ाक को हंसी में ना लेना

कई बार हमारे आस पास के लोग पीरियड्स को लेकर काफी मज़ाक करते हैं, या जोक्स सुनाते हैं। पीरियड्स को “दैट टाइम ऑफ़ द मंथ” बोलकर बहुत सी ऐसी चीजें बोलते हैं जिनको हमें अनसुना नहीं करना चाहिए। हमें इसके अगेंस्ट बोलना चाहिए, और उन लोगों को ये सब कहने के लिए मना करना चाहिए।

तो ऐसे आप पीरियड्स को नॉर्मलाईज़ कर सकते हैं

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