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पीरियड्स आखिर कैसे और क्यों होते हैं ?

Published by
Shilpa Kunwar

पीरियड्स स्टार्ट होते ही कितने ही परेशानी और बातों का ध्यान रखना पड़ता है जैसे पीरियड्स का दर्द, दाग लगने का झंझट और दुनिया भर के नियम। ये सब किसी भी आम लड़की के लिए हर महीने की जंग होती है। भारत में तो लड़कियों को अगर पीरियड्स हो तो न तो उन्हें किचन में एंट्री नहीं मिलती, मंदिर में एंट्री नहीं मिलती, कुछ-कुछ घरों में तो उन्हें बिस्तर में सोने भी नहीं दिया जाता। मतलब एक तरह से लड़कियों को उनके शरीर की ऐसी बनावट के लिए सजा ही दी जा रही है ना। पीरियड्स को लेकर कई तरह की कहानियां भी है लेकिन शायद ही किसी ने पीरियड्स होने की सही और पूरी जानकारी ली हो। चलिए, आज हम आपको बताते हैं कि हम महिलाओं को पीरियड्स होते कैसे और क्यों है।  जानिए periods kyu hote hain

क्या होते है पीरियड्स ? periods kyu hote hain

प्यूबर्टी के वक्त लड़कियों में होने वाला सबसे एहम शारीरिक बदलाव है पीरियड्स का शुरू होना | प्यूबर्टी एक ऐसा स्टेज है जब बच्चों के बॉडी के रिप्रोडक्शन पार्ट पूरी तरह से डेवलप हो जाते हैं। लड़कियों में जब यह पड़ाव आता है तब उनके पीरियड्स शुरू हो जाते है | इसका मतलब यही है कि अब उनका शरीर बेबी को बर्थ देने लायक हो गया है। लड़कियों में प्यूबर्टी का प्रोसेस आम तौर पर 11 साल की उम्र से शुरू हो जाता है जिसके बाद उनको पीरियड्स होने लगता है |

अब सवाल यह है कि महिलाओं के शरीर में पीरियड का प्रोसेस होता कैसा है ?

लड़कियों में पीरियड्स शुरू होने का मतलब है उनके ओवरीज़ का डेवलप हो जाना। पीरियड्स का मेन रोल प्रेगनेंट होने में मदद करना है। पीरियड सर्कल के शुरू होने पर हर महीने महिलाओं के दो ओवरीज़ में से कोई एक ओवरी बनाके गर्भाशय नाल (Uterine placenta) में रिलीज़ करता है जिसे ovulation कहा जाता है | इसके साथ-साथ शरीर दो तरह के हॉर्मोन्स बनाता है – एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टरोन | ये हॉर्मोन्स यूट्रस की परत को मोटा करते है ताकि प्रेगनेंट होने पर फर्टिलाइज़्ड एग्स उस परत से लग कर पोषण पा सके | यह परत खून और म्यूकस से बनी होती है।

जब फीमेल एग्स मेल स्पर्म से मिलकर फर्टिलाइज़ नहीं हो पाते तब यूट्रस की परत उस अंडे के साथ खून के रूप में वेजाइना से बाहर निकल आती है | इस प्रोसेस को पीरियड्स कहते हैं

पीरियड का असर

पीरियड से पहले और उसके दौरान महिला की अपने शरीर और ख़ुद से लड़ाई चलती रहती है। उसके मिज़ाज में बहुत से बदलाव नज़र आने लगते हैं। जी हां, ये सही बात है कि पीरियड्स शुरू होने से पहले औरत के मूड में बदवाल आता है। उसका मिज़ाज चिड़चिड़ा हो जाता है। शरीर के किसी ना किसी हिस्से में अजीब खिंचाव या दर्द होने लगता है। ये कैफ़ियत इशारा करती है कि अब बस कुछ ही वक़्त में ब्लीडिंग शुरू होने वाली है।periods kyu hote hain

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