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“कविता लेखन किसी थेरेपी से कम नहीं “- पूजा महाजन

Published by
Ayushi Jain

“कलम ये नहीं देखती कि आप पुरुष है या स्त्री”, यह कहना है युवा कवयित्री पूजा महाजन का। उन्होंने कविता लेखन को अपने जीवन का काफी महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है और कोरोनावायरस के इस समय में हम लेखन के ज़रिये तनाव से कैसे बच सकते हैं उस पर भी उन्होंने अपने विचार प्रस्तुत किये हैं।

आपने अपनी सबसे पहली कविता किस उम्र में पर और किस विषय लिखी थी ?

मैंने अपनी पहली कविता तब लिखी जब मै 19 साल की थी । मेरी पहली कविता थी “मुश्किलों से डरना तू छोड़ दे” इस कविता में मैंने बताया था कि मेहनत कभी ना कभी ज़रूर रंग लाती है भले ही आज नहीं तो कल, और गिर कर उठना और साहस रखना कभी-कभी बहुत बड़े कमाल कर जाता है । इस कविता को लोगो ने बहुत प्यार दिया । आज भी जब मैं प्रेरणाहीन होती हूँ तो वो पढ़ लिया करती हूँ, मुझे बहुत सुकून देती है वो कविता ।

“कविता लेखन अगर आप किसी दबाव में आ कर रहे है तो ये सही नहीं, अगर आप आराम से अपने विचारों को लिखे तो ये एक थेरेपी से कम नहीं ” – पूजा महाजन

कविता लेखन के लिए आपकी सबसे बड़ी प्रेरणा कौन है ?

मेरी प्रेरणा मैं खुद ही हूँ । मैंने किसी को देख कर लिखना शुरू नहीं किय। जब मैंने लिखना शुरू किया, मुझे ब्लॉग्गिंग के बारे में कुछ भी नहीं पता था, ना हि मैंने इतनी किताबे पढ़ी थी । मेरे जीवन में लिखने की शुरुआत इस लिए हुई क्योंकि मुझे हमेशा से ही अपनी कहानियां और अनुभवों को शेयर करना अच्छा लगता था और लिखना मुझे एक अच्छा माध्यम लगा, मै अक्सर मेन्टल हेल्थ और लाइफस्टाइल के बारे में लिखती हूँ जिस से लोग बहुत रिलेट करते है । ये सुनना की मेरी वजह से कोई डिप्रेशन से बाहर आ रहा है और लोगो का प्यार मेरी कविताओं और लेख को लेकर बढ़ रहा है ये ही मेरे लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है ।

कोरोनावायरस के समय में क्या कविता लेखन तनाव को कम करने में और अपने इमोशंस लोगों तक पहुंचने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है?

कविता लेखन अगर आप किसी दबाव में आ कर रहे है तो ये सही नहीं, अगर आप आराम से अपने विचारों को लिखे तो ये एक थेरेपी से कम नहीं । कोरोनावायरस के समय में आप जितना कम तनाव ले उतना अच्छा है ।

पहले हम जब भी तनाव में होते थे तो बाहर घूम आते थे, दोस्तों से मिल आते थे, किसी नयी जगह जा कर अपना तनाव दूर कर लेते थे ,अब जैसे हम कही जा नहीं सकते तो वो नकारात्मत ऊर्जा निकल नहीं पा रही, उस ऊर्जा को इस तरह इस्तेमाल करना एक बहुत अच्छा विकल्प है । हाल ही में मैंने लॉकडाउन में हो रही अपनी एंग्जायटी (anxiety) और उससे कैसे बहार आये इसके बारे में इंस्टाग्राम पर शेयर किया था जिससे लोगो को काफी मदद मिली ।

कलम ये नहीं देखती की आप पुरुष है या स्त्री। – पूजा महाजन

और पढ़ें: मिलिए कवि प्रदनया पवार से

सोशल मीडिया आपकी जर्नी में कैसे भूमिका निभा रहा है ?

सोशल मीडिया ने मेरी ज़िन्दगी को एक अलग ही रूप दिया है । आप बस कुछ ही सेकंड में अपने विचार दुनिया के किसी भी कोने तक पंहुचा सकते हो ये बहुत अद्भुत है । सोशल मीडिया ने मुझे काफी ब्रैंड्स के साथ काम करने का मौका दिया है जिसकी वजह से मुझे थोड़े बिज़नेस स्किल्स भी आये है । सोशल मीडिया की वजह से मुझे लोग मेरे काम से जानने लगे हैं । मेरी क्रिएटिव और पर्सनल लाइफ में काफी ग्रोथ हुई है।

क्या आपको लगता है समाज पुरुष कवियों को महिला कवयित्रियों से ज़्यादा महत्व देता है ?

मुझे लगता है ये एक ऐसा फील्ड है जहाँ आपके पुरुष या स्त्री होने से ज़ादा ज़रूरी ये होता है की आप अपने विचार कैसे लोगों तक पहुँचाते हो और लोग आपसे कितना रिलेट कर पाते है । कलम ये नहीं देखती की आप पुरुष है या स्त्री।

समाज में बदलाव लाने के लिए कविताओं की क्या भूमिका है

आपके लिखे और बोले हुए शब्द किसी की दुनिया बिगाड़ भी सकते है और बना भी सकते है । कविताएं एक इंसान पर बहुत गहरा प्रभाव छोड़ती है । कविताएं आपको तरह-तरह के दृष्टिकोण देती है, किसी की ज़िन्दगी से कुछ सिखने का मौका और खुद की ज़िन्दगी बेहतर करने की उम्मीद देती है । जज्बात कीमती होते है बहुत, और इसी पर मैंने लिखा था कि –

“जज्बात महेंगे है अल्फाज़ो से मेरे,
शब्दों को गिन कर ना खरीदना कविताएं मेरी”

और पढ़ें: मिलिए बुंदेलखंड के मशहूर अखबार खबर लेहरिया की संस्थापक कविता जी से

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