हमारे यहां मतलब इंडिया के टीवी सीरियल्स में लड़ाई-झगड़े और मसाला दिखाने के नाम पर सास-बहुओं की लड़ाई दिखाई जाती है। उसे देखने वाली ऑडियंस में भी सबसे ज्यादा सास और बहू होती हैं। अब सीरियल देखते-देखते कब वहां की लड़ाई अपने घर की सास-बहुओं में आ जाती है पता ही नही चलता। एक लड़की जो अपनी मां से बहोत ज्यादा प्यार करती है उसे उसका घर छोड़ कर अपने सास-ससुर और पति के घर रहना पड़ता है। उस लड़की को अपनी सास में अपनी मां जैसा प्यार नही मिलता और सीरियल की सास – बहू का रिश्ता देखकर उसे कही ना कही ये भी लगने लगता है कि जी मेरी सास भी मेरे खिलाफ ऐसे ही साजिशें रचेगी और मुझे मेरी मां जैसा प्यार नही दे पाएगी। फिर उसके पास ही रास्ता बचता है और वो है अपने मायके चले जाना। शादी के बाद ज्यादातर महिलाओं का अपने मायके जाने के पीछे का कारण उनकी सास ही होती है।

अक्सर हम ऐसी सास को देखते है जो अपनी बहुओं पर इल्जाम लगाती दिखती है कि उसकी वजह से मां-बेटें में लड़ाइयां हो रही है या उनकी बहू उनके बेटे को उनसे दूर कर रही है। लेकिन ऐसा नही कि हमारे समाज की सारी सास-बहुओं के रिश्ते खट्टे हैं। अभी भी कई सास और बहू ऐसी हैं जो आपस में काफी अच्छा रिलेशन निभाती है लेकिन ऐसा तभी होता है जब वो सास अपनी बहू को अपनी बेटी की तरह रखे और वो बहू अपनी सास को अपनी मां जैसा सम्मान और प्यार दे। अगर आप मुझसे पूछेंगें कि कैसी सास अच्छी होती है तो मैं यही कहूंगी कि अच्छी सास वही होती है जो अपने बेटे और उसके लाइफ पार्टनर से भेदभाव ना करे, जो अपनी बहू को अपने परिवार का हिस्सा मानें न कि एक पराए घर की लड़की।

देखो भई, ये बात तो बिल्कुल सच है कि फिल्मों की सास असली जिंदगी की सास से कई ज्यादा खतरनाक होती है। आपकी असली सास आपके साथ इतना प्लेनबाजी और आपके खिलाफ साजि़शें नही रचेंगी। इसलिए, ये ज़रूरी है कि केवल फिल्मों और सीरियल के आधार पर हमें किसी के बारे में पहले से ही कोई गलत धारणा नही बनानी चाहिए। एक अंडस्टेंडिंग बहू और समझदार सास एक-दूसरे से बेस्टफ्रेंड का रिश्ता निभाते हैं। इससे घर में खुशियों की बहार छाई रहती है। सास को चाहिए की वो अपनी बहू को अपनी बेटी जैसा प्यार दें क्योंकि कोई भी लड़की जो अपना घर-बार, मां-बाप सबको छोड़कर आपके घर रहने आई है, उसको आपसे काफी ज्यादा उम्मीदें होंगी। मैं जानती हूं कि ये कहना आसान है लेकिन करना मुश्किल, लेकिन इतना भी मुश्किल नही है। हम आज भी ऐसे कई केस देखते हैं जहां लड़कियां अपनी सास के लड़ाई-झगड़े और टॉर्चर के वज़ह से घर छोड़कर चली जाती है।

अच्छी सास अपनी बहुओं से उम्मीदों के पुल नही बांधती मतलब ओवर एक्सपेक्टेशन नही रखती

इस आर्टिकल को पढ़ने वाली सभी सासू मां और होने वाली सास, आप लोग को इस बात को गांठ बांध लेनी चाहिए कि आप अपने घर बहू लेकर आ रहे है जो आपके और आपके बेटे की तरह एक इंसान है ना कि सुपरविमेन। आप उससे घर के सभी काम करने की उम्मीद नही लगा सकते और वो भी तब जब वो बाहर भी काम करती हो। अगर आपका बेटा अपने काम से जल्दी घर आ जाता है और आपकी बहू नही आ पाती तो उसमे उसकी कोई गलती नही है। उसे घर जल्दी आने के बज़ाए आप उसे करियर में अच्छा करने को कहे, उसे प्रोत्साहित करे। आप उसे बदलने को कहेंगे, उसका लाइफस्टाइल चेंज करने को कहेंगे और वो भी किसलिए ताकि वो आपकी फैमिली में फिट हो जाए लेकिन आप खुद क्यों नही उसे उसकी लाइफस्टाइल के साथ एक्सेप्ट करती। कोशिश किजिए, आपको भी अच्छा लगेगा।

अपनी बहू की बात एक अच्छी सास बनकर सुनें

शादी के बाद भी लड़कियों के जीवन में ऐसे कई मौकें आते हैं या उनका जी करता है कि वो अपनी मां से बात करें। कोई भी बेटी अपनी मां से कुछ भी बोलने से पहले कुछ सोचती नही, बिना झिझक उसे सब बता देती है क्योंकि मां-बेटी के रिश्ते में अटूट विश्वीस होता है। ऐसा ही रिश्ता होना चाहिए सास-बहू का। ऐसे समयों में सास को अपनी बहू की बात प्यार से सुननी चाहिए। उसे अपने घर जैसा फिल कराना चाहिए। जितना हो सके उतना साथ में समय बिताएं और अपनी बातें भी शेयर करें। यही सब चीज़े तो रिश्ते की नींव मज़बूत बनाती है।

“तुम्हारी मां ने कुछ सिखाया नही है क्या?” इस डायलॉग को जितना हो सके उतना अवॉइड करे

ये बात तो आप भी जानती है कि कोई भी मां बिल्कुल वाईफ मेटीरीयल बेटी तो नही तैयार कर सकती। हालांकि, कई मां अपनी बेटी को हर वो चीज़ सिखाना चाहती है जो उसे दूसरे घर जाकर करना होगा लेकिन इससे भी ज्यादा वो इस बात पर ध्यान देती हैं कि कैसे उनकी बेटी एक आदर्श बहू बनने से पहले एक सक्सेसफुल लेडी बनें। आपने भी अपनी बेटी को ऐसे ही तैयार किया होगा लेकिन बहू की बात आते ही ये दोहरा रवैया क्यों? अब क्योंकि वो 4 रोटियां नही पका सकती और झूठे बर्तन नही धो सकती तो इसका मतलब ये नही कि आप उसके मम्मी-पापा के पालन-पोषण और दिए हुए संस्कार पर उंगली उठाएं।

सास और बहू आप दोनो ये बात जान लिजिए 

कि आपके रिश्तें में जलन और गलतफहम की कोई जगह नही होनी चाहिए। जितना समय आप दोनो एक-दूसरे के साथ गुजारेंगे उतना ही आप एक-दूसरे को जानेंगे और समझेंगे। हां, कभी-कभी लड़ाइयां हो जाती है, दोनो को काफी बुरा भी लग सकता है लेकिन अंत में आपको एक-दूसरे को माफ करके फिर से गले लग जाना चाहिए। जहां बहुओं को एक तरफ इस बात के लिए खुश होना चाहिए कि उनकी सास ने अपने आंख के तारे के लिए उन्हें चुना और बहू बनाना सही समझा, वही दूसरी तरफ सास को खुश होना चाहिए कि लड़की ने और लड़की के परिवार वालों ने उन्हें इस काबिल समझा कि वो अपनी बेटी आपको दे जहां वो खुश रहेगी। तो, सभी के अरमानों को ध्यान में रखते हुए सास-बहु को अपने लड़ाई-झगड़े एक पॉज़िटीव नॉट पर खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए।

ये काफी चौका देने वाली बात है कि आज भी काफी लड़कियां अपनी सास की शिकायत करती दिखती है। मैं जानना चाहूंगी कि क्या ये इतना मुश्किल है कि आप वही प्यार अपनी बहू को दें जो आप अपने बेटे को देती है? अगर आप उसे वही प्यार नही देती और सही बर्ताव नही करती तो आप उससे आपका सम्मान देने और प्यार देने की उम्मीद कैसे लगा सकती हैं? क्या सभी सास का अपनी बहुओं के साथ हंसी-खुशी और प्यार से रहना इतना मुश्किल है? जवाब हम सब जानते है बस जरूरत है उसे अपनाने का। टाईम बदल रहा है तो हमें भी अपनी आदतें बदल ही लेनी चाहिए क्योंकि आखिर सास भी कभी बहू थी। सास – बहू का रिश्ता अच्छा करने का यही एक तरीका है

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