हर साल 2 जून को इंटरनेशनल सेक्स वर्कर्स डे मनाया जाता है। इस दिन सेक्स वर्कर्स के शारीरिक और मानसिक रूप से शोषण को रेकग्नाइज़ किया जाता है। इसके साथ ही उनमें बढ़ रहे एचआईवी और कई तरह की अन्य सेक्सुअल बिमारियों के संक्रमण से उनके बचाव और रक्षा हेतु भी काम किया जाता है। जानिए क्यों मनाते हैं हम इसे आज के दिन और क्या है इसकी सिग्नीफिकेन्स।

क्या है इस दिन की हिस्ट्री?

2 जून को साल 1975 में फ्रांस के ल्योन शहर में कुल 100 सेक्स वर्कर्स जमा हुई थीं। उनके जमा होने का कारण था उनके खिलाफ हुए क्रिमिनल गतिविधियां और शोषण के प्रति आक्रोश व्यक्त करना। इस जुलूस का हिस्सा बनते हुए सारी सेक्स वर्कर्स ने अपने बच्चों की सेफ्टी के लिए भी गुहार लगाई थी। इसके बाद उन्होंने ग्लोबल प्लेटफार्म पे मीडिया कैंपेन भी लांच किया था ताकि पूरी दुनिया में उनकी बातों को सुना जाए और उनके खिलाफ हो रही गलत गतिविधियों को बंद कराया जाए।

क्या थी सेक्स वर्कर्स की मांग?

इन सेक्स वर्कर्स की मांग थी की उन पर हो रहे पुलिस हरैस्मेंट को बंद किया जाए, उनके काम करने की होटलों को खोला जाए और सेक्स वर्कर्स की मृत्यु की प्रॉपर इन्वेस्टीगेशन की जाए। इस अभियान को जारी रखते हुए उन्होंने देश भर में 8 दिन की स्ट्राइक भी की थी। इस कैंपेन का वहां की सरकार पर इतना प्रभाव पड़ा की उन्हें सेक्स वर्कर्स की बात माननी ही पड़ी और समय के साथ इस दिन को इंटरनेशनल सेक्स वर्कर्स डे के रूप में मनाया जाने लगा।

3 मार्च को मनाया जाता है इंटरनेशनल सेक्स वर्कर्स राइट्स डे

साल 2001 में कोलकाता में स्तिथ दरबार महिला समन्वय समिति ने करीब 25000 सेक्स वर्कर्स को इकठ्ठा करके फेस्टिवल सेलिब्रेट किया था। इसके पहले इन महिलाओं को किसी भी पूजा या त्यौहार में हिस्सा लेने नहीं दिया जाता था। इस अभियान का असर ये हुआ की अब पुलिस किसी भी सेक्स वर्कर को कहीं भी पूजा या त्यौहार में जाने से नहीं रोक सकती है।

क्या हुआ है कोविड का सेक्स वर्कर्स पे असर?

कोविड की महामारी में सेक्स वर्कर्स पे बहुत असर पड़ा है। उनकी तकलीफों और बिमारियों की लिस्ट भी बढ़ती ही चली जा रही है। ग्लोबल नेटवर्क ऑफ़ सेक्स वर्क प्रोजेक्ट्स और UNAIDS ने इन हालातों पे बहुत चिंता प्रकट की है। सेक्स वर्कर्स के ह्यूमन राइट्स के बचाव के लिए भी UNAIDS ने सभी देशों को अपना भरसक प्रयास करने के लिए कहा है।

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