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Photograph: (Freepik)
सोशल एंग्जायटी सिर्फ़ शयनेस नहीं है, बल्कि यह वह डर है जिसमें इंसान लोगों के बीच खुद को लगातार जज होता हुआ महसूस करता है। मीटिंग में बोलने से घबराना, भीड़ से बचना या हर बातचीत के बाद खुद को कोसते रहना—ये सब इसके आम संकेत हैं। अच्छी बात यह है कि सोशल एंग्जायटी को पूरी तरह खत्म न सही, लेकिन सही तरीकों से मैनेज ज़रूर किया जा सकता है। यहां ऐसे 5 आसान तरीके हैं, जो आपको इससे डील करने में मदद कर सकते हैं।
सोशल एंग्जायटी से परेशान हैं? इससे डील करने के आसान तरीके
1. अपनी एंग्जायटी को एक्सेप्ट करें, उससे लड़ें नहीं
सबसे पहली औसोशलर ज़रूरी बात है यह मानना कि सोशल एंग्जायटी कोई वीकनेस नहीं है। जब आप खुद को बार-बार यह कहते हैं कि “मुझे ऐसा फील नहीं करना चाहिए”, तो एंग्जायटी और बढ़ जाती है। इसके बजाय अपनी फीलिंग्स को एक्सेप्ट करें। खुद को यह समझाएं कि नर्वस होना ह्यूमन नेचर है और इससे आपकी वैल्यू कम नहीं होती।
2. परफेक्शन का प्रेशर छोड़ें
सोशल एंग्जायटी अक्सर इस डर से आती है कि कहीं आप गलत न बोल दें या लोग आपको अजीब न समझ लें। ये याद रखें, हर सोशल इंटरैक्शन कोई परफॉर्मेंस नहीं है। ज़रूरी नहीं कि आप हर बातचीत में स्मार्ट या कॉन्फिडेंट दिखें। जब आप परफेक्ट बनने का प्रेशर छोड़ते हैं, तो दिमाग ऑटोमेटिकली रिलैक्स होने लगता है।
3. छोटे एक्सपोज़र से शुरुआत करें
खुद को एकदम बड़ी सोशल सिचुएशन में धकेलने की बजाय छोटे स्टेप्स लें। किसी एक इंसान से बात करना, ऑफिस में एक सवाल पूछना या दुकान पर ऑय कांटेक्ट करके बात करना—ये छोटे एक्सपोज़र धीरे-धीरे आपके डर को कम करते हैं। कॉन्फिडेंस अचानक नहीं आता, यह छोटे एक्सपीरियंस से बनता है।
4. अपने नेगेटिव थॉट्स को चैलेंज करें
“सब मुझे देख रहे हैं” या “मैं बेवकूफ लगूंगा” जैसे विचार सोशल एंग्जायटी को बढ़ाते हैं। खुद से पूछें—क्या इसका कोई सबूत है? ज़्यादातर जवाब ‘नहीं’ होता है। दिमाग की हर बात सच नहीं होती, और इसे समझना बहुत ज़रूरी है।
5. बॉडी और माइंड दोनों को शांत करना सीखें
सोशल एंग्जायटी सिर्फ़ दिमाग में नहीं, बॉडी में भी फील होती है। ऐसे में डीप ब्रीदिंग, थोड़ी देर वॉक या ग्राउंडिंग एक्सरसाइज़ मदद कर सकती हैं। अगर एंग्जायटी बहुत ज़्यादा असर डाल रही है, तो प्रोफेशनल हेल्प लेने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए। सोशल एंग्जायटी से डील करना एक जर्नी है, रेस नहीं। धीरे-धीरे आगे बढ़ना भी प्रोग्रेस ही है।
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