Women Journalists: क्यों बढ़ता जा रहा है फीमेल जर्नलिस्ट पर अत्याचार

महिला पत्रकारों को इंटरनेट पर तरह-तरह के कॉमेंट्स का सामना करना पड़ता है। उन्हें हर समय खतरे का असमान रूप से अनुभव होता है, जो उनकी सुरक्षा और भविष्य की ऑनलाइन गतिविधियों को प्रभावित करता है। आइए जानते हैं ऐसी इश्यूज के बारे में इस ब्लॉग के जरिए

Aastha Dhillon
05 Jan 2023
Women Journalists: क्यों बढ़ता जा रहा है फीमेल जर्नलिस्ट पर अत्याचार

Women Journalists

Trolling Of Women Journalists: अक्सर हम देख सकते हैं कि लड़कियां और महिलाएं आसमान की ऊंचाइयों को छूती जा रही हैं। हमारा समाज उनके लिए हर कदम पर कठिनाई बनाता रहता है। 

क्या आप जानते हैं तालिबान ने महिला पत्रकारों को स्क्रीन पर हिजाब पहनने का आदेश दिया है। इतना ही नहीं भारत में भी महिला जर्नलिस्टों को काफी उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। भारत में ऑनलाइन हमले में महिला पत्रकारों की तस्वीरों के साथ अश्लील कलाकारों के शरीर और उनके टेलीफोन नंबर प्रकाशित करके घिनौने तरीके से काम किया है। भारत में ज्यादातर साइबर अपराध महिला पत्रकारों, विशेष रूप से मुस्लिम महिला पत्रकारों के साथ होते हैं। वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका सबा नकवी भी इनका निशाना बन चुकी हैं।

विश्व स्तर पर परेशान है महिला जनरलिस्ट

जर्नलिस्ट शिरीन अबू को इसरायली मिलिट्री ने गोली मार दी थी। वह रिपोर्टिंग करने के लिए गयी हुई थीं। इस न्यूज़ को फिर पैलेस्टाइन की हेल्थ मिनिस्ट्री और एक क़तार के न्यूज़ चैनल ने कन्फर्म किया था। शिरीन अबू आर्मी रेड के ऊपर स्टोरी कर रही थीं जेनिन नाम की सिटी में जब इनकी गोली मारकर हत्या की गयी थीं। मिडिल ईस्ट में शिरीन एक जाना माना नाम है।

अनगिनत शर्मनाक घटनाएं है ऐसी 

बुधवार दोपहर दिल्ली पुलिस ने एक पत्रकार को किया गिरफ्तार। दलित टाइम्स (Dalit Times) की पत्रकार सृष्टि जाटव (Srishti Jatav) को पुलिस ने कुछ देर के लिए गिरफ्तार कर लिया जब वह जामिया नगर में कवरेज के लिए पहुंचीं थी।

दक्षिण कोलकाता बेहाला में एक ऐप आधारित कैब के ड्राइवर ने एक महिला पत्रकार से छेड़छाड़ की और उसकी दोस्त के साथ मारपीट की। 

ऑनलाइन भी हो रही है ट्रोलिंग

कुछ महिला पत्रकार ऑनलाइन हिंसा के अपने अनुभव के जवाब में फ्रंटलाइन रिपोर्टिंग से हट रही हैं, खुद को सार्वजनिक ऑनलाइन बातचीत से हटा रही हैं, अपनी नौकरी छोड़ रही हैं और यहां तक ​​कि पत्रकारिता भी छोड़ रही हैं। लेकिन महिला पत्रकारों के ऑनलाइन हिंसा के खिलाफ लड़ने, पीछे हटने या चुप रहने से इनकार करने के कई मामले सामने आए हैं , भले ही बोलने से उन्हें बड़ा निशाना बना दिया गया हो। 

जब किसी महिला पत्रकार को ऑनलाइन हिंसा की धमकी दी जाती है, तो इसे बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उसे शारीरिक सुरक्षा सहायता (आवश्यक होने पर बढ़ी हुई सुरक्षा सहित), मनोवैज्ञानिक सहायता (परामर्श सेवाओं तक पहुंच सहित), और डिजिटल सुरक्षा ट्राइएज और प्रशिक्षण (साइबर सुरक्षा और गोपनीयता उपायों सहित) दोनों प्रदान की जानी चाहिए। 

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