ट्विटर का आरोप,अभिव्यक्ति स्वतंत्र पर खतरा – हाल ही में सोशल मीडिया के आए नए गाइडलाइंस को लेकर ट्विटर और सरकार के बीच विवाद का माहौल है। सरकार ट्विटर को नए नियमों का पालन करने के लिए कह रही है लेकिन वही ट्विटर इस बात का खंडन कर रहा है।

सरकार पर ट्विटर ने लगाया आरोप

ट्विटर ने गुरुवार को सरकार पर “खतरनाक अतिक्रमण” जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विरुद्ध है” का आरोप लगाया और कहां की “लेगितिमेट फ्री स्पीच को रोकने के लिए दबाव डाला जा रहा है”।

हालांकि बयान में ट्वीट्स के बारे में विस्तार से नहीं बताया गया, लेकिन सूत्रों ने अनुसार, ये किसान विरोध से संबंधित ट्वीट्स को हटाने के सरकार के अनुरोध से संबंधित थे। जिसमें से कुछ को केंद्र ने भारत कि सेंटीमेंट्स को ठेस पहुंचाया है। दूसरी कोरोनावायरस लहर से निपटने से नहीं निपट पाने वाले ट्वीट्स को हटाने की बात की है।

सरकार का इस विषय में क्या कहना है ?

जवाब देते हुए सरकार ने इस बारे में कहा कि इधर उधर की बातें करना बंद करनी होगी और नए नियमों को मानना होगा। किसी भी देश में कानून और नियम बनाना देश का अधिकार है।

ट्विटर सोशल मीडिया है, भारत में क्या नियम होना चाहिए और नहीं इस मैटर को दखल नहीं करना चाहिए। सरकार ने यह भी कहा कि क्यों उत्तर भारत के सिस्टम को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है और भारत के नियमों में दखलअंदाजी कर रहा है।

सरकार का आरोप की ट्विटर देश में अपनी शर्त थोपने की कोशिश कर रहा

आईटी मंत्रालय ने ट्विटर के आरोपों का गलत साबित करते हुए कहा कि ट्विटर सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में अपनी शर्त थोपने की कोशिश कर रहा है। ट्विटर उन रेगुलेशन का पालन करने से मना कर रही है जिसके आधार पर उन्हें सुरक्षा मिलती है।

दिल्ली की पुलिस इन ट्विटर के बारे में कहा कि टूलकिट मामले का बयान झूठा था। पुलिस का यह बयान तब आया है जब ट्विटर के द्वारा पुलिस पर डराने धमकाने का आरोप लगाया गया था। सरकार ने भी टूलकिट मामले हस्तक्षेप बात को लेकर हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है।

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