हमारे देश में बचपन से बेटियों को ये सिखाया जाता है की उन्हें बड़े हो कर शादी करनी हैं। उन्हें ये समझाया जाता है की एक अच्छी पत्नी और फिर आगे चल कर एक अच्छी माँ बन कर रहना ही उनके लाइफ का लक्ष्य है। माँ-बाप होने के नाते अपनी बेटियों से शादी के बदले दूसरी बातें करनी ज़रूरी है। हम आज भी ऐसी सोसाइटी में रहते हैं जहाँ एक कुंवारे लड़के को सम्मान और एक कुंवारी लड़की को अपमान भरी नज़रों से देखा जाता है। ऐसे में ये बहुत ज़रूरी है की आप अपनी बेटियों से शादी के बदले ये सारी बातें करें:

1. फिनांशियल इंडिपेंडेंस सब कुछ है

माँ-बाप को अपनी बेटियों को फिनांशियल इंडिपेंडेंस सीखना बहुत ज़रूरी है। एक लड़की के पास ज़िन्दगी जीने के लिए खुद के रिसोर्सेज होने बहुत ज़रूरी है। इसलिए अपनी बेटियों को फिनांशियल इंडिपेंडेंस की इम्पोर्टेंस भी समझाएं और उसकी करियर चोइसेस को सपोर्ट भी करें। ये एक पैरेंट होने के नाते आपकी सबसे बड़ी रिस्पांसिबिलिटी है।

2. अपने आप को सबसे ऊपर रखें

एक लड़की को बचपन से सिखाया जाता है की उसे हमेशा अपने पति और बच्चों की नीड्स को सबसे ऊपर रखना है। ये धारणा एक छोटी सी बच्ची के मन को ख़राब कर सकती है। इसलिए उसे बचपन से ये सिखाना बहुत ज़रूरी है की उसे अपने आप को हमेशा सबसे ऊपर रखना है। ये बात उसे समझाना बहुत ज़रूरी है की उसकी ज़िन्दगी में उससे ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट और कोई नहीं है इसलिए वो सिर्फ अपनी खुशियों पर ही ध्यान दें।

3. सोसाइटी के तानों का असर न पड़ने दें

एक लड़की को आगे बढ़ता हुआ ये सोसाइटी कभी नहीं देख सकती है। अगर कोई लड़की सोसाइटी की दकियानूसी सोच की बेड़ियों से निकलना चाहे भी ये तो समाज उसे तानें मार-मार कर उसका कॉन्फिडेंस ख़त्म करने की पूरी कोशिश करता है। इसलिए बेटी को ये सिखाएं की सोसाइटी की बातें सुनने की कोई ज़रूरत नहीं है और एक अच्छी ज़िन्दगी जीने के लिए उसे सोसाइटी के ऊपर नहीं बल्कि खुद के ऊपर ध्यान देना है।

4. 25 साल के उम्र में ज़िन्दगी ख़त्म नहीं होती है

अपनी बेटी को समझाएं की कोई भी काम करने की कोई स्पेसिफिक उम्र नहीं होती। अगर वो 25 साल से पहले शादी करने के लिए तैयार नहीं है, तो आपको भी इसकी कोई जल्दी नहीं है। अपनी बेटी को ये भी समझाएं की उसकी खुशियां आपके लिए किसी भी और बात से ज़्यादा ज़रूरी है इसलिए वो किसी भी उम्र में कुछ भी अचीव कर सकती है।

5. कभी भी किसी चीज़ में कोम्प्रोमाईज़ करने की ज़रूरत नहीं है

एक लड़की की ज़िन्दगी कोम्प्रोमाइसेस का घेरा नहीं होनी चाहिए। अपनी बेटी को ये सिखाएं की वो सब कुछ बेस्ट डिज़र्व करती है और उसे कहीं भी बेमतलब के कोम्प्रोमाइसेस करने की कोई ज़रूरत नहीं है। सोसाइटी की बातों को अनसुना करते हुए अपनी बेटी को सिखाएं की कोई भी समझौता करने की उसे कोई ज़रूरत नहीं है।

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