Acid Attack Survivors: क्या होगा एसिड अटैक्स का अंत?

तेजाब की कुछ बूंदे उन लड़कियों को जिंदगी भर का दाग दे जाती हैं। महिलाओं के साथ हो रहे हिंसक अपराधों में एसिड अटैक बहुत ही खतरनाक और नुकसानदायक अपराध माना जाता है। जानिए इस ओपिनियन ब्लॉग के माध्यम से किस तरह एसिड अटैक सरवाइवर्स रह पाती है जिंदा

Aastha Dhillon
11 Jan 2023
Acid Attack Survivors: क्या होगा एसिड अटैक्स का अंत?

Acid Attack Survivors

Acid Attack Survivors: हमारे देश में बहुत से खतरनाक अपराध होते हैं और खासतौर पर महिलाओं के साथ। महिलाओं के साथ हो रहे हिंसक अपराधों में एसिड अटैक बहुत ही खतरनाक और नुकसानदायक अपराध माना जाता है। इसमें शारीरिक चोट के साथ मानसिक सदमा हद से ज़्यादा होता है। भारत जैसे देश में हर दिन न जाने कितने एसिड अटैक के केस हमें देखने को मिलते हैं। भारत में ऐसी दर्दनाक कहानियां हैं जो दिल दहला देती हैं । 

जहाँ इतने डेंजरस एसिड अटैक हो रहे हैं वहीं दूसरी तरफ ऐसे बहुत से कदम हैं जो एसिड अटैक विक्टिम्स की भलाई के लिए भी लिए जाते हैं। इस खतरनाक अपराध के खिलाफ जागरूकता फैलाने से लेकर एसिड की बेवजह बिक्री पर भी रोक लगाईं गई है । 

एसिड अटैक गंभीर क्रूरता

किसी को मौत के घाट उतार देने से उसकी पूरी जिंदगी खत्म की जा सकती है, उसका हाथ पांव काट देने से उसको अपंग किया जा सकता है लेकिन अगर किसी पर तेजाब डाल दिया जाए तो वह इंसान ना मर पाता है ना ही जी पाता है। तेजाब से बदसूरत हुई जिंदगी को हमारा समाज सर उठाकर जीने की इजाजत नहीं देता। यही वजह है कि हम इस बार अपने सोशल इश्यू ब्लॉग के द्वारा एसिड अटैक के बारे में लोगों को जागरुक कर रहे हैं। तेजाब की कुछ बूंदे उन लड़कियों को जिंदगी भर का दाग दे जाती हैं। 

हाल ही में हुआ एक एसिड अटैक

दिल्ली के द्वारका नगर से एक बहुत ही जघन्य घटना सामने आई है, जहां पर एक 17 साल की लड़की के ऊपर तेजाब फेंका गया। यह घटना आज 14 नवंबर की सुबह करीब 7:30 बजे की है। आपको बता दें ऐसे फेंकने के कारण उस लड़की की दोनों आंखों में काफी गंभीर चोट आई है। 

एसिड अटैक सरवाइवर्स के लिए एक पहल

लखनऊ और आगरा में "शीरोज हैंगआउट कैफे" के बाद, वाराणसी में एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए जल्द ही एक कैफे होगा, जो उनके लिए चलाया जाएगा।

"द ऑरेंज कैफे" नाम का कैफे वाराणसी के दुर्गा कुंड क्षेत्र में जल्द ही खोला जा रहा है और यह सोच अजय कुमार पटेल की है, जिन्होंने 2011 में "रेड ब्रिगेड" नाम का ऍनजीओ  शुरू किया जो महिलाओं को सेल्फ-डिफेन्स की ट्रेनिंग देता है।  

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