Privacy A Controversy? बेटियों पर कड़ी नज़र क्यों रखी जाती है?

Privacy A Controversy? बेटियों पर कड़ी नज़र क्यों रखी जाती है? Privacy A Controversy? बेटियों पर कड़ी नज़र क्यों रखी जाती है?

Monika Pundir

05 Aug 2022

यदि आप एक भारतीय घराने में पले-बढ़े हैं, तो आपको प्राइवेसी (निजता) की धारणा के विवाद से अच्छी तरह वाकिफ होना चाहिए। भारतीय घरों में, प्राइवेसी की कमी को नैतिकता के एक मार्कर के रूप में देखा जाता है, क्योंकि आपके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है- कोई रहस्य नहीं, कोई बुरी आदत नहीं है या जीवन का कोई पहलू नहीं है जो सामाजिक रूप से प्रभावित होगा। इस प्रकार, एक व्यक्ति जितना अधिक प्राइवेसी मांगता है, उतना ही उसके चरित्र पर सवाल उठाया जाता है। किसी भी अन्य सामाजिक नियम की तरह, महिलाओं को भारतीय घरों में प्राइवेसी के प्रतिबंधों का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है।

बेटियों की निजता: एक अधिकार माता-पिता नहीं चाहते कि उनके पास हो

मुझे यकीन है कि कई युवा इन अनुभवों से संबंधित होंगे या अधिक जोड़ना चाहेंगे, की उनके जीवन में प्राइवेसी कितनी एलियन कांसेप्ट थी। उदाहरण के लिए, मेरी एक दोस्त उसके ट्यूशन के लड़के से बात करती थी, नोट्स लेती थी अगर कुछ मिस हो गया हो। एक दिन उसकी माँ ने उसके फोन में लड़के का नाम देखा और उसे बहुत पीटा। ज़रूरी बात यह है की उस चाट में केवल नोट्स के तस्वीर थे।

मेरी माँ की एक मित्र गर्व से अपनी बेटी के पर्सनल डायरी और मैसेज देखने का दावा करती है। जिस दिन लड़की ने डायरी में किसी लड़के के बारे मैं देखा, अगले ही दिन उसकी माँ ने पढ़ लिया और “हम इसलिए तुमको स्कूल भेजते हैं?” वाला झगड़ा  गया।

प्रत्येक व्यक्ति को संबंध बनाने, डायरी रखने या रहस्य रखने का अधिकार है। लेकिन लोगों को उसके लिए इतना शर्मिंदा नहीं किया जाता है कि वे निजी तौर पर करते हैं बल्कि अपने जीवन के कुछ हिस्सों को अपने परिवार से छिपाने की हिम्मत के लिए शर्मिंदा किया जाता है।

जब उनकी बेटियां अपना जीवन और प्राइवेसी चाहती हैं तो माता-पिता को गुस्सा क्यों आता है? वे उनसे अपने जीवन में होने वाली हर चीज की रिपोर्ट करने की अपेक्षा क्यों करते हैं? क्या माता-पिता का अपना कोई रहस्य नहीं है? यदि उनके बच्चे अपने जीवन के सभी पहलुओं के बारे में जानकारी मांगना शुरू कर दें तो क्या माता-पिता को यह नहीं लगेगा कि उनकी निजता पर हमला किया जा रहा है?

इसके अलावा, जब महिलाओं की बात आती है, तो उनकी निजता को सीमित करना उनके जीवन के हर हिस्से को जानने के बारे में नहीं है। लेकिन यह नियंत्रित करने के बारे में भी है कि उनका जीवन कैसे आगे बढ़ता है।

हमारे समाज में महिलाएं व्यक्ति नहीं बल्कि नैतिकता और प्रतिष्ठा की अभिव्यक्ति हैं। उनका शरीर और पहचान उन्हें स्वतंत्र बनाने के लिए नहीं बल्कि उन्हें पैट्रिआर्की के सेवक बनाने के लिए है। माता-पिता को अपनी बेटियों के जीवन को नियंत्रित करने के लिए लगातार याद दिलाया जाता है। लड़की हाथ से निकल जाएगी एक बहुत ही आम डर है जिसे समाज ने हथियार बना लिया है और माता-पिता को अपनी बेटियों को पुलिस करने के लिए मजबूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

माता-पिता को अपनी बेटियों की स्वतंत्रता, विशेष रूप से उनके निजता के अधिकार को नियंत्रित करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उनके जीवन में जो कुछ भी चल रहा है वह माता-पिता की देखरेख में होना चाहिए। एक बेटे की गलती को नजरअंदाज किया जा सकता है, या इस विश्वास के साथ माफ किया जा सकता है कि पुरुष पुरुष होंगे। लेकिन एक बेटी की गलती न केवल उसकी प्रतिष्ठा पर बल्कि परिवार पर भी धब्बा बन जाती है।

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