UNICEF की एक रिपोर्ट के अनुसार 60 % छात्राएं पीरियड्स के कारण स्कूल जाना छोड़ देती हैंं। यह संख्या बहुत ज्यादा हैं। लोग आज भी मेंस्ट्रुएशन को नॉर्मली ट्रीट नहीं करते। क्यों लड़कियों को शुरू से इसके लिए प्रिपेयर नहीं करते ? क्यों हम उनकी प्रॉब्लम सॉल्व करने के बजाये उन्हें स्कूल जाने से रोकते हैं ? क्या स्कूल छुड़वा देने से ये प्रॉब्लम सॉल्व हो जाती हैं ?

पीरियड्स के कारण लड़कियां स्कूल क्यों छोड़ देती हैं?

मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट्स की प्रॉपर फैसिलिटी ना होने के कारण, लड़कियों को अक्सर घर पर रहने के लिए मजबूर किया जाता है, जिस वजह से लड़किया पीरियड्स में स्कूल नहीं जा पाती। इसका मुख्य कारण पानी और टॉयलेट का इंतजाम न होना हैं। इसके साथ – साथ लड़कियां कपड़े में दाग लगने के डर ,सेनिटरी नैपकिन की कमी और दर्द के कारण भी स्कूल जाना छोड़ देती हैं। कभी-कभी, तो लड़कियां हमेशा के लिए स्कूल छोड़ देती हैं। भारत में, यह अनुमान लगाया गया है कि जब किसी लड़की को पीरियड्स आना शुरू हो जाते हैं, तब 5 में से 1 लड़की स्कूल छोड़ देती हैं और कुछ क्षेत्र, जैसे महाराष्ट्र में यह संख्या 5 में 4 के पास है।

लड़कियों का स्कूल जाना क्यों महत्वपूर्ण हैं ?

रिसर्च से पता चला है कि लड़कियों को स्कूल भेजना न केवल उनके हैल्थ के लिए इम्पोर्टेन्ट है, बल्कि पूरी कम्युनिटी के डेवलपमेंट के लिए महत्वपूर्ण है। जब एक लड़की सेकन्डरी स्कूल पढ़ती हैं तो वह बाल विवाह , घरेलु हिंसा जैसी समस्याओं की संभावना कम रहती हैं। वह सही – गलत , अपने अधिकार आदि के बारे में अवेयर हो जाती हैं।

हम कैसे इस समस्या को सुलझा सकते हैं ?

मां को 9-10 साल की उम्र में बेटी को पीरियड्स के बारे में जानकारी दे देनी चाहिए। अगर उसे पीरियड्स शुरू होने से पहले इस बारे में पता हो तो वह तनाव से बच पाएगी। उसे यह भी बताएं कि यह बिल्कुल सामान्य प्रक्रिया है और यह जरूरी है। बच्ची के स्कूल बैग में पैड रखना चाहिए और उसे इसकी जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा, स्कूलों में टीचर्स को भी इसे लेकर सेंसिटिव होना चाहिए। स्कूल में भी पैड और अन्य मेंस्ट्रुअल फैसिलिटी मुहैया होनी चाहिए।

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