5 Realistic Moms Of Bollywood: भारतीय मां की सच्ची कहानियां

5 Realistic Moms Of Bollywood: भारतीय मां की सच्ची कहानियां 5 Realistic Moms Of Bollywood: भारतीय मां की सच्ची कहानियां

Sanjana

08 Jul 2022

पुरुष प्रधान समाज में यह सदियों से चला आया है कि अगर किसी महिला को शर्मिंदगी महसूस करवानी है तो उसे यह अहसास करा दिया जाए कि वह एक अच्छी मां नहीं है। क्योंकि भारतीय समाज में शुरू से ही महिलाओं के हर किरदार के लिए कुछ पैमाने तय किए गए हैं। अगर वे इन पैमानों को पूरा नहीं कर पाती हैं तो वे एक अच्छी मां बीवी या बेटी नहीं है। लेकिन सच तो यह है एक अच्छी मां बनने और अपने बच्चों की खुशी के लिए वह अपनी हर मुमकिन कोशिश करती हैं।

इस माहौल में रहते रहते हमें इसकी आदत हो चुकी है इसलिए हमें अपनी मां के साथ हो रही चीज आम सी लगती है। लेकिन जब बॉलीवुड इसको दिखाता है तो हमें यह समझ में आता है की असलियत क्या है। आज हम आपको ऐसी ही पांच बॉलीवुड के किरदारों के बारे में बताएंगे जो भारतीय माओ की एकदम असली रिप्रेजेंटेशन है।

बेस्ट ऑन स्क्रीन मां -

1. नीलम मेहरा (दिल धड़कने दो)

इस बात को कोई नहीं झुठला सकता कि मां के तौर पर नीलम मेहरा थोड़ी सी टॉक्सिक जरूर है। लेकिन आखिरकार अपनी खोखल शादी को झेलने के बाद उन्होंने अपनी बेटी के साथ ऐसा नहीं होने दिया।

हां उनका किरदार पुरुष प्रधान समाज का ही एक भाग है जो लिंग के आधार पर भेदभाव में विश्वास रखता है। और वह अपनी बेटी को भी यही सिखाती हैं लेकिन असलियत में यह उनकी गलती नहीं है।

2. प्रियमदेवा कौशिक (बधाई हो)

Ageism एक ऐसा विषय है जो यह सिखाता है कि महिलाओं को एक निर्धारित समय तक शादी कर लेनी चाहिए, निर्धारित समय तक बच्चे और एक निर्धारित समय तक दादी बन जाना चाहिए।

लेकिन प्रियम देवा ने हमें यह महसूस करवाया है कि मां भी एक इंसान होती है जिसे अपनी खुद की जिंदगी को अपने अनुसार जीने का हक है। उसके लिए वक्त की कोई पाबंदी नहीं होनी चाहिए, वह जब चाहे जो चाहे कर सकती है।

3. शशि गोडबोले (इंग्लिश विंग्लिश)

महिलाओं को एक मां बनने के बाद बहुत सी चीजों के लिए जज किया जाता है। जैसे अगर वह अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाना चाहे तो लोग उसे ताने देते हैं। यहां तक कि सही से इंग्लिश ना आने पर शशि को उसके बच्चों द्वारा अच्छे से सम्मान भी नहीं मिलता। लेकिन शशि ने यह साबित कर दिया कि वह सब कुछ कर सकती है। और किसी मां को परफेक्ट बनने की कोई जरूरत नहीं है।

4. सुलोचना (तुम्हारी सुलु)

सुलोचना अपने लिए एक कैरियर और एक परिवार दोनों चाहती है। लेकिन हमारे समाज में महिलाओं का ऐसा बताया जाता है किया तो वे अपना करियर ही संभाल सकती हैं या फिर परिवार।

अगर आप अपने करियर और परिवार को एक साथ संभालने की कोशिश करेंगे तो आप की स्थिति दो नाव में सवार व्यक्ति जैसे हो जाएंगे। लेकिन सुलोचना ने यह साबित कर दिया कि एक मां भी परिवार के साथ अपना करियर बखूबी संभाल सकती हैं।

5. परमिंदर प्रकाश (हम तुम)

परमिंदर प्रकाश एक बहुत ही सपोर्ट सिंगल मदर हैं। वह अकेले ही अपनी बेटी को पालती है और उसकी हर जरूरत को पूरा करती हैं। वह यह अच्छे से जानती हैं कि अपनी बेटी को उन्हें आगे बढ़ने के लिए उसकी जिंदगी और उसका पर्सनल स्पेस देना होगा।

लेकिन मुसीबत के समय या अपनी बेटी को भटकने से रोकने के लिए वह हमेशा उसके साथ खड़ी रहती है। यह किरदार मिसाल है कि सिंगल मदर भी अपने बच्चों को पाल सकती हैं।

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