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10 एनजीओ जो महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रहे हैं

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STP Hindi Editor

पिछले एक दशक में भारत में एनजीओ सेक्टर में बड़ा विस्तार हुआ है. ये लोग वंचित समुदायों के जीवन का ख़ास हिस्सा बन रहे हैं, जिसकी वजह से इन लोगों के जीवन में बदलाव आ रहा है. एक अद्भुत और समर्पित समूह के नेतृत्व में, गैर सरकारी संगठन देश के विभिन्न हिस्सों में सेवा कर रहे हैं. महिलाओं का सशक्तिकरण कुछ संगठनों के लिये एक प्रमुख मुद्दा हैं. इस क्षेत्र में काम कर रहे प्रमुख 10 एनजीओ.

सेवा

द सेल्फ एमप्लाइड वुमेंस एसोसिएशन(एसईडब्ल्यूए) की स्थापना 1972 में गुजरात में एला भट्ट ने की थी. मूल रूप से एक ट्रेड यूनियन, एसईडब्ल्यूए अब विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है. उनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को अनौपचारिक श्रमिकों के रूप में पहचान देकर उन्हें मजबूत करना है. इसके अलावा, वे महिला श्रमिकों के अधिकारों पर काम करने और प्रदर्शनों के अहिंसक तरीकों का उपयोग करने की कोशिश करते हैं. सेवा बैंक, सेवा आंदोलन, सेवा भारत इसके कुछ संगठन हैं. अभी तक इनके पास 1.9 मिलियन महिला सदस्य है जो गर्व से अपने अधिकारों का प्रतिनिधित्व करती हैं.

स्नेहालया

स्नेहालय की स्थापना 1989 में महाराष्ट्र के अहमदनगर में हुई थी. यह गैर सरकारी संगठन गरीबी से प्रभावित महिलाओं और बच्चों और एलजीबीटी समुदायों के लिए काम करता है. यह एचआईवी और एड्स से लड़ने और मानव तस्करी खत्म करने के उद्देश्य से यौन श्रमिकों के उत्थान के लिए भी काम करता है. उनकी विशेष परियोजनाओं में सैनिटरी पैड का उत्पादन, महिलाओं को अपनी कला बनाने और बेचने और महत्वपूर्ण भाषा कौशल विकसित करने के लिए जगह प्रदान करना शामिल है.

एनईएन: उत्तर पूर्व नेटवर्क

एनईएन को 1995 में महिलाओं पर बीजिंग विश्व सम्मेलन के हिस्से के रूप में स्थापित किया गया था. एनईएन की उद्देश्य में लिंग न्याय, समानता और मानवाधिकारों के प्रति सम्मान को शामिल किया गया है. यह जेंडर क्षेत्र में बजट आवंटन और महिलाओं की सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर काम करता है. संगठन असम, मेघालय, नागालैंड और उत्तर पूर्व भारत के अन्य हिस्सों में सक्रिय है.

आज़ाद फाउंडेशन

आजाद फाउंडेशन शहरी भारत में रहने वाली गरीब महिलाओं के लिए काम करता है जो किसी भी तरह के शोषण का सामना करती हैं. यह उन्हें गरिमा का जीवन प्रदान करने और उन्हें स्वतंत्र बनाने के उद्देश्य से काम करता है. फाउंडेशन में, महिलाएं छह महीने के पाठ्यक्रम से गुजरती हैं जिसमें आत्म-जागरूकता, रक्षा प्रशिक्षण और प्रजनन अधिकार और अन्य चीज़े सिखाई जाती है. उन्होंने हाल ही में सखा के साथ काम करना शुरु किया है, जो महिलाओं के लिये महिलाओं द्वारा शहरों में संचालित कैब चालक सेवा है.

सीआरईए

नई दिल्ली में 2000 में स्थापित, सीआरईए एक नारीवादी मानवाधिकार संगठन है. यह आत्मविश्वास बढ़ाने, सेक्शुएलटी के बारे में जागरूकता लाने और महिलाओं में नेतृत्व क्षमता बढ़ाने के लिए दमनकारी मानदंडों को चुनौती देने और कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्लेटफॉर्म प्रदान करता है. यह दक्षिण में अंतर्राष्ट्रीय महिला संगठन का एक हिस्सा है.

सेंटर फॉर सोशल रिसर्च (सीएसआर)

ये जेएनयू से ताअल्लुक रखने वाले सामाजिक वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा स्थापित संस्था है.  सीएसआर की स्थापना 1983 में नई दिल्ली में हुई थी. इसका उद्देश्य सामाजिक अनुसंधान, क्षमता निर्माण और वकालत के माध्यम से एक हिंसा मुक्त समाज बनाना है. यह लिंग, समानता के लिए बेहतर सिस्टम बनाने में मदद करने वाले स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय, तीन स्तरों पर कार्य करता है.

विमोचाना

विमोचाना 1979 में बैंगलोर में स्थापित एक एनजीओ है. यह एक कार्यकर्ता समूह है जो महिलाओं के अधिकारों के लिए एक मंच प्रदान करता है. विमोचाना में एक केंद्र अंगला, उन महिलाओं की मदद करता है जो नौकरियां पाने के लिए उनसे संपर्क करती हैं. इसके अलावा, अगर मां अपने बच्चे या बच्चों की देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं तो वह अनाथालय में उन्हें जगह उपलब्ध कराते है साथ ही जरूरत पड़ने पर महिलाओं को चिकित्सा उपचार प्रदान किया जाता है.

स्वनीति

रितविका बनर्जी द्वारा शुरू, स्वानिती स्थानीय वास्तविकताओं और निर्वाचित प्रणालियों के बीच के अंतर को खत्म करता है. विशेष रूप से ग्रामीण भारत और ग्रामीण महिलाओं के साथ काम करते हुए, वे निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए समाधान और नीतियों को तैयार करने और सरकारी योजनाओं को एकत्रित करने में मदद करते हैं. उनके ऑन-ग्राउंड रिसर्च में ग्रामीण भारत पर रिसर्च होता है और साथ ही उनकी कठिनाइयों को समझा  जाता है.

माकम

महिला किसान अधिकारी मंच भूमिहीन महिला किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली संस्था है. यह हमारे देश के 24 राज्यों में फैली हुई है.  माकाम के मिशन में भूमि जैसे स्थायी आजीविका संसाधनों पर अधिकार देकर महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बनाना शामिल है.

जनोदया

जनोदय ने 2017 में 30 साल पूरे किए हैं. महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए काम करना, इसका उद्देश्यों में शामिल है. साथ ही निराश्रित महिलाओं और पूर्व कैदियों की स्थितियों में सुधार करना है. वे महिलाओं को अलग-अलग जीवन कौशल सीखने और आपसी समझ से न्यायसंगत और कानूनी बस्तियों पर पहुंचकर अपना उद्देश्य प्राप्त करते हैं.

पढ़िए :क्या आप एक एनजीओ शुरू करना चाहते हैं ?

 

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