5 Rights For Women In India: भारत में महिलाओं के लिए 5 विशेष अधिकार जो आपको पता होने चाहिए

Published by
DISHA DHIMAN

Rights For Women In India: हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां महिलाओं को हर दिन तंग, परेशान, दुर्व्यवहार, बलात्कार और अपहरण किया जाता है। औरतों से जुड़े मामलों पर नज़र रखते हुए, भारत सरकार ने यहां की औरतों को बहुत सारे अधिकार दिए हैं। जेंडर इकुअलिटी के बेसिस पर, भारत में एक महिला के पास कई अधिकार हैं। आइये जानते हैं ऐसे ही 5 अधिकार:

Rights For Women In India: भारतीय महिला के अधिकार

1. महिलाओं को समान वेतन का अधिकार

इकुअल रेम्युनिरेशन एक्ट के तहत लिस्टिड प्रोविशंस के अनुसार, जब वेतन या मजदूरी की बात आती है तो जेंडर के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है। वर्किंग वीमेन को भी उतनी ही सैलरी लेने का अधिकार है जितना की किसी मेल एम्प्लॉये को दी जाती है।

2. वर्कप्लेस हर्रासमेंट के खिलाफ़ अधिकार

वर्कप्लेस पर महिलाओं का सेक्सुअल हर्रासमेंट एक्ट एक महिला को अपने वर्कप्लेस पर किसी भी तरह के हर्रासमेंट के खिलाफ़ शिकायत दर्ज करने का अधिकार देता है। इस एक्ट के तहत, 3 महीने के अंदर एक ब्रांच ऑफिस में एक आंतरिक शिकायत समिति (ICC) को एक रिटेन कंप्लेंट दी जा सकती है।

3. घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार

भारतीय संविधान का सेक्शन 498 पति, मेल लिव-इन पार्टनर या रिश्तेदार के हाथों घरेलू हिंसा से पत्नी, फीमेल लिव-इन पार्टनर या घर में रहने वाली महिला जैसे मां या बहन की रक्षा करता है। आरोपी को गैर-ज़मानती जेल की सज़ा दी जाती है जो तीन साल तक हो सकती है और जुर्माना भी देना पड़ सकता है।

4. वर्चुअल कंप्लेंट दर्ज करने का अधिकार

कानून महिलाओं को ई-मेल के ज़रिये शिकायत दर्ज करने या अपनी शिकायत लिखने और एक रजिस्टर्ड पोस्टल अड्रेस से पुलिस स्टेशन भेजने का प्रोविजन देता है। इसके अलावा, एसएचओ उसकी शिकायत दर्ज करने के लिए एक पुलिस कॉन्स्टेबल को उसकी जगह पर भेजता है। ऐसा तब होता है जब कोई महिला फिज़िकली पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराने की सिचुएशन में नहीं होती है।

5. ज़ीरो एफआईआर का अधिकार

एक एफआईआर जिसे किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया जा सकता है, चाहे वह घटना किसी भी जगह पर हो या किसी स्पेसिफिक जूरिस्डिक्शन के अंडर आती हो, ज़ीरो एफआईआर के बाद उस पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर किया जा सकता है जिसके एरिया में मामला आता है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने विक्टिम का समय बचाने और अपराधी को बच निकलने से रोकने के लिए पारित किया था।

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