शादी से पहली जो घर की लाड़ली हुआ करती थी, अब शादी के बाद जीना भूल गयी। शादी से पहले पिता से हर छोटी से छोटी चीज़ के लिए ज़िद्द करने वाली अब अपनी चाहतें मरना सीख गयी। अपना हर शौंक पूरा करनेवाली वो नटखट कली अब चुप्पी में जीना सीख गयी। पूरी क्लास में फर्स्ट आनेवाली वो लड़की जिसकी आँखों में हज़ारों सपने थे शादी के बाद सपने देखना भूल गयी। ऐसा क्यों हुआ ? क्योंकि उसने खुद को भूलकर अपने पति के लिए जीवन जीना सीख लिया। अपनी खुद की पहचान को किनारे रखकर पति की पहचान अपना ली। अपने सपनों की क़ुरबानी देकर पति के सपनों को अपनी पहचान बनाना सीख गयी।

रिपोर्ट्स के अनुसार ऐसा क्यों होता है की शादी के बाद एक लड़की के सपने उसकी ज़िम्मेदारियों की जगह ले लेते हैं और वो अपने शौंक और जीवन में कुछ करने की चाह की भुला बैठती है ? अक्सर एक लड़की होने के कारण मेरे मन में हज़ारों सवाल उठते हैं, जिनके जवाब मुझे आजतक कोई नहीं दे सकता ?

अपनी पहली प्रायॉरिटी आप खुद

शादी के बाद एक लड़की के जीवन में दूसरे ही क्यों प्रायॉरिटी बन जाते हैं ?वो खुद के लिए जीना क्यों भूल जाती है? उसका पति ही उसके लिए सब कुछ क्यों बन जाता है ? न जाना पता नहीं ऐसे कितने ही सवाल जो शायद आपक मन भी उठते होंगे।

बचपन से हम लडकियां भी अपने गोल्स और करियर के लिए कम मेहनत नहीं करती पर बड़े होती ही हमारे जीवन में शादी नाम की बेड़ियाँ बाँध दी जाती हैं और हमसे कहा जाता है की जाओ अपने पति के घर को अपना बनाओ ,उसके सपने ही सब कुछ हैं। यह सोच बिलकुल गलत है। जब आजकल की लड़कियों ने कहीं भी खुद को प्रूव करने में कमी नहीं रखी है फिर अभी भी उनके लिए ऐसी सोच क्यों ?

एक लड़की होने के नाते आपको कुछ बातों को समझना होगा

  • शादी के बाद एक लड़की को खुद के करियर और सपनों को कभी भी बैक सीट नहीं करना चाहिए।
  • आपका अपने करियर को बखसैत करना आपके पति के लिए आपके प्यार का सबूत नहीं है।
  • हर रिश्ते में पति और पत्नी दोनों बराबर होते हैं, ऐसे में दोनों को अपने सपने पूरे करने का हक़ है।
  • अगर आप अपने सपने पूरे करेंगी तो बुरी पत्नी नहीं कहलाएंगी।
  • आपको अपने पति के लिए अपने शौंक, सपने और अपने करियर की क़ुरबानी देने की ज़रूरत नहीं है।
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