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इन 4 तरीकों से कम करें बच्चों की जिद करने की आदत

Published by
Nayan yerne

ये हम सब अच्छे से जानते हैं कि अगर छोटे बच्चों का मिजाज बिगड़ जाए तो उन्हें समझाना मुश्किल ही नही नामुमकिन हो जाता है। खासतौर पर पब्लिक प्लेस पर अगर वे जिद करें या गुस्सा दिखाने लगें तो पेरेंट्स को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ जाता हैं। ऐसा ज्यादातर 1 से 5 साल के बच्चों के साथ होता है। बाज़ार में बच्चों की जिद को संभालने के तरीके और ऐसी सिचुएशन से निपटने के लिए हम आपको कुछ टिप्स बताते हैं।

ये हैं बाज़ार में बच्चों की जिद को संभालने के तरीके (bacchon ki zid ko sambhalne ke tarike)-

1.कहीं भी समझाना शुरू न करें

मान लिजिए आप कपड़े लेने गईं, बच्चे ने आपके हिसाब से ड्रेस तो ले ली, लेकिन वहां उसने आप से बहस भी बहुत की। ऐसे में आप क्या करती हैं? तुरंत डांटने लगती हैं। अगर आप ऐसा करती हैं तो यह गलत है| डांट और मार किसी बात का हल नहीं  है| आप बच्चे के साथ जिस वक्त भी आराम से बैठती हैं, उस वक्त उससे उसकी गलत हरकतों के बारे में बात करें। यह वक्त रात में सोने से पहले का भी हो सकता  है और सुबह बच्चे के स्कूल जाने से पहले का भी। इसके अलावा उसको स्कूल छोड़ने जाती हैं तो उस वक्त भी आप बच्चे को उसकी गलती समझा सकती हैं। पर, ऐसा कभी भी चलते-फिरते या कोई दूसरा काम करते हुए न करें।

2.सख्त हो जाइए

आइये एक उदाहरण  के तोर  पर इस बात को समझें। एक बच्चा  है जिसके पिता उसे ढेरों सामान सिर्फ इसलिए दिलवाते हैं ताकि वो परेशान न करे। जब उन्हें टोका जाता है तो वो कहते हैं, सामान न मिलने पर बच्चा बहुत ज्यादा शैतानी करने लगता है। वो खुद को भी नुकसान पहुंचा सकता है। बच्चे की जिद के कारण उसे वो सब दिला दिया जाता है जिसको इस्तेमाल करने की उसकी अभी उम्र भी नही है, जैसे 30 हजार रुपये का फोन। अगर आपका बच्चा इतनी ज्यादा जिद कर रहा है तो इसके लिए आप लोग जिम्मेदार हैं। अगर आप हर बार बच्चे की जिद पूरी करेंगे तो उसे इसकी आदत लग जाएगी। जब बच्चे को बाहर लेकर जाएं तो उसकी मांगी पांच चीजें उसे दिलवाने की जगह उसे सिर्फ एक चीज दिलवाने पर अड़ी रहें। धीरे-धीरे उसकी यह आदत सुधर जाएगी।

3.स्कूल टीचर करेगी मदद

स्कूल टीचर की बात बच्चे अक्सर मान लेते हैं। जब बच्चा पब्लिक प्लेस पर ज्यादा परेशान करने लगे तो इससे छुटकारा पाने के लिए बच्चे की स्कूल टीचर से बात करें। एक समय के बाद बच्चे के ऊपर माता-पिता की बातों का असर कम होने लगता  हैं , ऐसे में टीचर की बातें प्रभावी साबित होती हैं।

4.छोटी-छोटी धमकियां तैयार रखिए

धमकियां मतलब छोटी-छोटी वो बातें, जो ऐसे समय पर बेहद काम आ सकेंगी। ऐसा करके आप बच्चे को अपने लिए बेहतर चुनाव करने का विकल्प देती है। बच्चे अपने फायदे के हिसाब से चुनेंगे, पर इस दौरान आपको अपनी कई बातों पर टिके रहना है। जैसे आप बेटे के साथ बाजार गईं हैं, पर वो तो एक के बाद एक चीजें मांगता ही जा रहा है। तो आप क्या करेंगी? उसको सब कुछ दिलवाती जाएंगी या फिर उसकी आदत सुधारने की कोशिश करेंगी? इस कोशिश में कुछ बातों से आपको मदद मिल सकती है:

  • अगर अभी यह खिलौना खरीदोगे तो अगले15 दिनों तक बाहर जाना बंद।
  • अगर अब तुमने वापस झूले पर बैठने की जिद की, तो सोच लो अगले पूरे हफ्ते खेलने नहीं जाने दूंगी।
  • अगर रेस्टोरेंट में खाना खाने में इतनी आनाकानी करोगे तो अब तुम्हारे टिफिन में तुम्हारे पसंद का कुछ भी नहीं रखूंगी।
  • आप उसे उसका फेवरेट कार्टून न देखने देने की धमकी भी दे सकती हैं।

ये हैं बाज़ार में बच्चों की जिद को संभालने के तरीके ।

और पढ़िए : अपने बच्चों को चोट लगने से बचानें के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स

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