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आपके बच्चे को लगता है डर तो इन बातों का रखें खास ध्यान

Published by
Nayan yerne

बच्चों का मन बहुत साफ और नाजुक होता है। उनके सामने होने वाली हर बात को वे सही मान लेते हैं। कई बच्चे भूत वाले सीरियल या कहानी सुन लेते हैं जिससे उनके मन में डर बैठ जाता है। ऐसे में वे रात को अकेले बाहर जाने से डरने लगते हैं और कई बार तो उन्हें सपने भी भूतों वाले ही आते हैं। बचपन में कई बार कुछ चीज़ों को लेकर बच्चों के मन में ऐसा डर घर कर जाता है कि बड़े होने के बाद भी वे इससे उबर नहीं पाते। इस स्थिति से जितनी जल्दी और जितने इफेक्टिव तरीके से निपटा जाए उतना ही बेहतर होता है। अगर आपका बच्चा भी डर से जूझ रहा है तो  पेरेंट्स को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। बच्चों के डर कैसे दूर करे

डर भगाना है तो जरूर कीजिए ये उपाय – क्योंकि डरना मना है..

मजाक न बनाएं

बच्चे अपने डर के बारे में बताए तो उसे गंभीरता से सुनें, अगर आप उसका मजाक बनाएंगे तो वह आपको इस बारे में बताना छोड़ देगा। ऐसी स्थिति में उसका डर पर काबू करना या उसका सामना करना मुश्किल हो जाएगा।

बात करें

छोटे बच्चों से बातचीत हमेशा करते रहें। किसी भी चीज के डर के बारे में वे आपको तभी बताएंगे जब वह आपके साथ रिलेक्स महसूस करेंगे और ऐसा तभी संभव है जब वह आपके साथ फ्रेंडली हों, इसके लिए बातचीत का सिलसिला जारी रहना चाहिए।

बच्‍चे को बताएं कि आप हमेशा उसके साथ रहेंगे

इस बात का ध्यान रखें कि आपका बच्चा यह जान ले कि उसे सब प्यार करते हैं और उसकी सुरक्षा के लिए आप हमेशा उसके साथ होंगें।

न दिखाएं अंधेरे का डर

बच्चों को सबसे ज्यादा डर अंधेरे से लगता है। इसका फायदा उठाते हुए कुछ पैरेंट्स बच्चे को शांत करवाने के लिए या अपनी बात मनवाने के लिए अंधेरे का सहारा लेते हैं, लेकिन ये गलत है। अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं, तो तुरंत बंद कर दें। दरअसल इससे बच्चे डर तो जाते हैं, लेकिन उनके मन पर बुरा असर पड़ता है और उनके मन में हमेशा के लिए डर बैठ सकता है।

घर या कमरे के उस हिस्से में बच्चे के साथ जाए जिससे बच्चा डरता है

सभी दरवाज़ें खोल दें, बेड के नीचे देखें-रोशनी करके दिखाएं कि वहाँ कुछ नहीं है। अगर आपका बच्चा किसी आवाज़ या परछाई से डरता है तो उसे बताए कि वे आवाज़ें वास्तव में किस वजह से हो रही हैं।

डरावने चरित्रों से दूर रखें

अक्सर बच्चे उन काल्पनिक चरित्रों से डरते हैं, जिन्हें वे टीवी पर देखते हैं। दरअसल बच्चा वास्तविकता और कल्पना में अंतर नहीं समझता। ऐसे में जरूरी है कि आप उसे इस तरह के डरावने चरित्रों से दूर रखें।

डॉक्टर की लें मदद

डर की फीलिंग को खत्म करने के लिए अगर आप सबकुछ ट्राइ कर चुके हैं और तब भी इसका असर होता नहीं दिख रहा है तो डॉक्टर की मदद लें। कौन क्या सोचेगा इस बारे में चिंता न करें क्योंकि आपके लिए पहली प्राथमिकता सिर्फ आपका बच्चा ही है।

पढ़िए : कैसे एक फेमिनिस्ट बेटे की परवरिश करे?

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