हमें आजकल फेमिनिज्म और वीमेन एम्पावरमेंट से संबंधित कई स्लोगन्स सुनने को मिलते है। उनमें से एक स्लोगन है : अपनी बेटी को तरीके से कपड़े पहनने की सीख या देर रात तक घर से ना निकलने की बजाय बेटे को अच्छे से बर्ताव करना सिखाना चाहिए। लेकिन ये उनको कौन सिखाएगा ? ज़ाहिर सी बात है, शुरुआत घर से होती है। एक इंसान का पहला नज़रिया उसका परिवार होता है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने बच्चो को सही चीज़ सिखाये ताकि आप वही चीज़ देख भी सके। इतना पढ़ने के बाद आप ये भी सोच रहे होंगे की अब बेटे को किस तरह से बड़ा करे ताकि वो फेमिनिज्म समझे और एक फेमिनिस्ट बेटा भी बने। हमने पहले भी इससे रिलेटेड कुछ पॉइंट्स बताये थे, ये उन्ही के आगे के कुछ और पॉइंट्स हैं। तो आइए जानते है :

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1 . रोने का मतलब वीक होना नहीं होता

रोना बिलकुल ठीक है। कभी अपने बेटे को रोने से मत रोकिये। हर बार जब आप उसे ‘एक लड़की की तरह ना रोने’ को कहते हैं, तो आप स्वाभाविक रूप से एक नेगेटिव व्यू दे रहे हैं कि केवल महिलाएं रोती है। रोना एक कमज़ोरी नहीं, बल्कि सिर्फ भावना हैं, दोनों पुरुष और महिलाओं के लिए।

2 . कभी न कहें ‘एक लड़की की तरह बर्ताव ना करो’

यह शब्द कि ‘एक लड़की की तरह व्यवहार नहीं करते है’ लड़कियों को अपमानित करना है। यदि आपका बेटा सॉफ्ट टॉयज़ के साथ खेलना पसंद करता है, तो उसे खेलने दें। ऐसे वाक्यों का यूज़ करके आप अनजाने में कट्टरता ऑर्थोडॉक्स को बढ़ावा दे रहे होते है और इससे उसे विश्वास हो जाता है कि वह ऐसा कुछ नहीं कर सकता जो एक लड़की करती है।

3 . लड़कियों के साथ दोस्ती के लिए एंकरेज करें

लड़कियों के साथ दोस्ती करने पर मना नहीं करना चाहिए बल्कि प्रेरित करना चाहिए। अपने बेटे को बताएं कि लड़कियां बियोलॉजीकली अलग है पर एलियन नहीं हैं ।

4 . महिलाओं के दिक्कतों के बारे में जानकारी दें

महिलाओं की अलग अलग दिक्कतों के बारे में बात करना ज़रूरी है। उन्हें इन दिक्कतों के अलग- अलग पहलू के बारे में बताए और सेंसिटिव बनाए।।

5. उसे खाना बनाना सिखाएं

अपने बेटे को ये मत कहिये की खाना बनाना एक लड़की काम है। खाना बनाना एक बेसिक स्किल है जो सबको सीखनी चाहिए।

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