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बंगाल चुनाव: नंदीग्राम में ममता बैनर्जी की अद्भुत जीत क्या दर्शाती है

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paschima

ममता बैनर्जी द्वारा नंदीग्राम जीतने की सूचना दिए जाने के बाद, चुनाव आयोग ने उनके प्रतिद्वंद्वी और भाजपा समर्थित उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी को विजेता घोषित किया। जैसा की शुरुवात में लग रहा था की सुवेंदु अधिकारी ममता से काफी आगे थे लेकिन शाम होते होते ममता 1200 वोट से आगे हो गयीं थी। लेकिन फिर एक बार वोटों ने सुवेंदु अधिकारी के पक्ष में एक मोड़ ले लिया और वह पीछे हो गयी। और 1957 वोटों से हार गईं।

“नंदीग्राम के लोगों को जो भी फैसला देना है, मैं उसे स्वीकार करती हूं। नंदीग्राम एक बलिदान था जो बड़ी जीत के लिए ज़रूरी था । बैनर्जी ने कहा हमने स्टेट में जीत हासिल की है। अधिकारियों के अनुसार, बैनर्जी की जीत की प्रारंभिक रिपोर्ट नंदीग्राम में मतगणना पूरी होने से पहले आई।

TMC सुप्रीमो बंगाल में अपनी सीट बरकरार रखे हुए हैं

TMC सुप्रीमो को यह समझ आगया था की महिलाओं के लिए लड़ना और काम करना बहुत ज़रूरी है और इसीलिए उन्होंने पिछले 10 सालों में समाज में महिलाओं का कद बढ़ाने और महिलाओं के लिए कई तरह की योजना न केवल बनायीं पर बखूबी उनपे अमल भी किया। और यही कारण है की वह आज फिर तीसरी बार राज्य में अपनी जगह बनायीं हुई हैं।

ममता बैनर्जी का नंदीग्राम से लड़ने का फैसला

दिसंबर 2020 में, अधिकारी ने बीजेपी में शामिल हो गए, जो बंगाल चुनाव में TMC के प्रमुख दावेदार थे। उनके जाने के मद्देनजर, अन्य कई लोगों ने ऐसा किया और इसलिए टीएमसी के वरिष्ठ सदस्यों ने बैनर्जी के खिलाफ आलोचना की। इस की वजह से अदिकारी और बैनर्जी के बीच कड़ी चुनौती को सेट किया, और ममता ने कहा कि वह अपने सामान्य भवानीपोर के बजाय नंदीग्राम से अपना नामांकन दाखिल करेंगी।

“मैंने सुना है कि कुछ लोग मुझे नंदीग्राम में एक बाहरी व्यक्ति के रूप में बुला रहे थे। मैं आश्चर्यचकित हूँ , मेरा जन्म पास के बीरभूम जिले में हुआ था, और जो व्यक्ति मुझे बाहरी व्यक्ति कह रहा है, वह भी यहाँ पैदा नहीं हुआ था, “बैनर्जी ने अपनी रैलियों के दौरान भाजपा के‘ बाहरी व्यक्ति ’के टैग पर बदला लिया था।

ममता बैनर्जी की जीत क्या बताती है ?

महिला मतदाताओं द्वारा समर्थित और सभी तरह के मिश्रित युवा नेताओं द्वारा सहायता किये जाने पर बैनर्जी की बंगाल में बड़ी जीत उस पक्ष का संकेत है जो उन्होंने पिछले 2 बार से बंगाल में किया और उसी के नतीजे स्वरुप उन्हें तीसरी बार यह मौका फिर मिला।

बंगाल में ममता की अद्भुत जीत हमें यह बताती है की महिलाओं के योगदान से भारत के चुनाव में कितना फरक आसकता है। भाजपा द्वारा बड़ी बड़ी रैलियां करने और रोड शो करने के बावजूद भी बैनर्जी ने हार नहीं मानी। बल्कि उन्हें पता था की असल जीवन में उनकी योजनाओं से घर चलाने वाली महिलाओं को कितना फायदा हुआ।

उन्होंने यह भी बता दिया की जीतने के लिये हमेशा लहर की नहीं बल्कि ग्राउंड लेवल पर काम करने की ज़रूरत होती है। मोदी शाह की भारत में लहर होने के बावजूद भी वह जीत गयी क्योंकि उन्होंने ग्राउंड लेवल पर राज्य के लिए काम किया। उन्होंने अकेले ही सत्ता में होनी वाली पार्टी से जीत हासिल की।

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