बॉलीवुड LGBTQ समुदाय से संबंधित मुद्दों को उठा रहा है और उन्हें सिल्वर स्क्रीन पर ला रहा है। यहां पांच भारतीय एलजीबीटीक्यू लव स्टोरी हैं , जिन्होंने अपनी शक्तिशाली और सेंसेटिव कहानियों के साथ लोगों के दिल जीत लिए।

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एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा (2019)

फिल्म नॉर्मलसी (normalcy)  की भावना के साथ होमोसेक्सुअलिटी की सूक्ष्मताओं (subtleties) को छूती है। फिल्म स्वीटी चौधरी की कहानी है, जो एक lesbian की भूमिका में है, और वह अपने रूढ़िवादी ( Conservative) और traditional पंजाबी परिवार से बाहर आने की कोशिश करती है।

Margarita with a Straw (2014)

कल्कि कोचलिन हमें एक युवा लड़की का ईमानदार चित्रण देती है, जो एक पाकिस्तानी महिला के प्यार में पड़ जाती है। जैसे ही वो एक यात्रा की शुरुआत करती है तो उसे पता चलता है कि वह बायसेक्सुअल है। आखिर में, लैला अपनी माँ को अपनी सेक्सुअलिटी और उसके व ख़ानुम के बीच के रिश्ते के बारे में बताने का साहस जुटा पाती है।

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अलीगढ़ (2016)

फिल्म की कहानी अलीगढ़ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रामचंद्र सिहास के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है । यह कहानी उत्तर प्रदेश के एक विश्वविद्यालय की सच्ची घटना पर आधारित है। जिसमें श्रीनिवास रामचन्द्र मराठी पढ़ाते थे। लेकिन जब उनके होमोसेक्सुअल होने का पता चलता है, तो उन्हें वहाँ से हटा दिया जाता है।

माई ब्रदर निखिल (2005)

फिल्म एक ऐसी समय में सेट की गई है, जब एड्स और होमोसेक्सुअलिटी के बारे में जानकारी नहीं थी। यह एक स्विमर के जीवन के चारों ओर घूमता है, जिसे एड्स का पता चलता है और उसे अपनी टीम और परिवार से दूर रखा जाता है। इसके बाद, नायक को उसकी बहन और पार्टनर द्वारा सपोर्ट किया जाता है। इस मूवी ने एलजीबीटीक्यू समुदाय से काफी समर्थन प्राप्त किया।

फायर (1996)

यह लेस्बियन रिलेशनशिप को स्पष्ट रूप से पोट्रे करने वाली पहली इंडियन फीचर फिल्म बनी। फायर दो महिलाओं के बारे में एक फिल्म है, जो अपने पति द्वारा गलत व्यवहार करने के बाद आपस में इंटिमेट रिलेशनशिप बनाती हैं। फिल्म की रिलीज़ के बाद कई विरोध प्रदर्शन हुए।

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