माता पिता बनना एक कुदरती करिश्मा है पर कभी कभी ये आपको परेशान कर सकता है। जब आप रात रात भर सो ना पाएं और आपको दिन भर भी काम करना पड़े। छोटे बच्चे का रूटीन कोई फिक्स नहीं होता है ये कभी भी सोते हैं और कभी भी जागते हैं । ये अपनी मर्जी के मालिक होते हैं। छोटे बच्चे एक फिक्स समय के लिए सोते हैं जो 30 से 45 मिनट के बीच का होता है और वो ऐसे ही थोड़ा सो सोकर अपनी नींद पूरी करते हैं। इस समय को “कैटनापिंग ” कहते हैं।

अधिकतर बच्चे अपने रात का और दिन का सोने का समय गड़बड़ करते रहते हैं। ऐसे सोने का समय आपको आपके बच्चे के लिए चिंतित कर देता होगा और आप सोचते होंगे कि आपका बच्चा अच्छे से सो नहीं पा रहा है पर ऐसा नहीं है बच्चे इसी तरीके से सोते हैं। ये सिर्फ शुरुवाती कुछ सालों के लिए ही ठीक होता है। बच्चे के पैदा होने के बाद शुरू के 4 साल का होने तक बच्चे का दिमाग सोने का टाइम सेट करने लायक समझदार नहीं हो पाता है।

बच्चे क्यों कैटनापिंग करते हैं ?

बच्चे इतने कम कम समय के लिए इसलिए सोते हैं क्योंकि उन्हें सोने की आदत नहीं होती जिसके कारण उनकी बार बार नींद टूटती है और फिर वापस नींद आने में दिक्कत होती है। अगर इसके बाद आप अपने बच्चे को ताली बजाकर या उनकी पीठ ठोक कर सोने कि आदत डालते हैं तो वो फिर वैसे ही सोने की आदत डाल लेते हैं और उसी आवाज से सोते हैं। ऐसा करने से उन्हें उस चीज़ से सोने की बुरी आदत हो सकती है जो आपको बाद में परेशानी देगी।

कैसे डालें बच्चे को खुद सोने की आदत ?

इस के लिए आप ध्यान दें कि आपका बच्चा कब थक रहा है और कब वो ओवासी ले रहा है या अपनी उंगलियां चूस रहा है। जैसे ही ऐसे कोई लक्षण दिखें आप उनको तुरंत उनके बिस्तर या झूले में दाल दें इस से वो धीरे धीरे खुद ही सोने लगेंगे। आप उनको बीच में सोने में कोई भी मदद ना करें और अपने आप ही सोने दें।

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