हमें अधिकतर यह देखने को मिलता है कि बच्चे 12th ग्रेड पास कर चुके हैं लेकिन उन्हें सेक्स, सेक्स एजुकेशन, कंसेंट आदि शब्दों का सही अर्थ ही नहीं पता होता। जो आधी – अधूरी जानकारी उन्हें प्राप्त होती है वो उनके दोस्तों, मूवीज, या किसी पुस्तक से होती है। हम सब इस बात से परिचित हैं कि किसी भी विषय में पूरी जानकारी न होना कितना खतरनाक हो सकता है।कंसेंट पर शिक्षा

जानिए स्कूल में सेक्स एजुकेशन और कंसेंट पर शिक्षा के अनिवार्य होने के कारण

1) स्वयं के लिए स्टैंड लें सकें

अगर बच्चों को इस विषय पर सब इनफॉर्मेशन एंड फैक्ट्स पता होंगे, तो वे सही और गलत का फैसला करने में सक्षम होंगे। खुद के एवं दूसरों के साथ यदि गलत होता हुआ देखेंगे तो आवाज़ उठा पाएंगे। सही कदम लेने में वे हिचकिचाएंगे या गबराएँगे नहीं।कंसेंट पर शिक्षा

2) बदलते रिश्तों को समझ पाएंगे

उन्हें ये पता होगा की एक सक्सेसफुल रिलेशनशिप में कंसेंट कितना मायने रखता है। जब उनके रिलेशनशिप में इंबैलेंस होगा तो वे उससे डील करने के तरीके जानते होंगे। उन्हें यह जानकारी होगी कि किससे मदद लेनी है या कब एक रिलेशनशिप से बाहर हो जाना चाहिए।

3) प्यूबर्टी के दौरान होने वाले चेंजेस

प्यूबर्टी के समय शरीर में कई फिजिकल, इमोशनल और सोशल रूप से बदलाव आते हैं। उन चेंजेस के साथ प्रॉपर तरीके से डील करना बहुत ज़रूरी है। सही जानकारी नहीं होने पर अक्सर बच्चे इसमें ऊलज जाते हैं। कभी -कभी कुछ गलत भी कर बैठते हैं। इसलिए स्कूल में सेक्स एजुकेशन के बारे में विस्तार से बताना चाहिए। कंसेंट पर शिक्षा

4) रिप्रोडक्टिव और सेक्सुअल हेल्थ की जानकारी

उन्हें कंट्रासेप्टिव डिवाइसेस या पिल्स के बारे में बताएं। उन्हें सेक्शुअल इंटरकोर्स के टाइम न यूज करने से होने वाले इंफेक्शंस और ब्लड – बॉर्न वायरस की जानकारी दें। सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिसीजेस या सेक्स के लिए ना भी कहा जा सकता है ये बताएं। 

5) एक – दूसरों की डायवर्सिटी की रिस्पेक्ट करना सीखे

यह ज़रूरी है कि इतनी इनफॉर्मेशन होने पर हम उसका इंप्लीमेंटेशन सही से करें। दूसरों के विचार एवं राय का हम सम्मान करना सीखें। लोगों की डायवर्सिटी ऑफ़ चॉइसेस की हम वैल्यू करें। किसी का जेंडर या अन्य आधार पर उपहास न उड़ाएं। इससे उनकी भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है।

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