सहमति/कंसेंट की सबसे जरुरी बात ये होती है कि हर कोई इंसान जो भी कर रहा हो उसमें आरामदायक हो। अगर कोई भी किसी भी समय अनकम्फर्टेबल होता है तो उसको अधिकार है कि वो वहीं रोके। वहीं दूसरी ओर अगर आप किसी के भी साथ कोई काम कर रहें और बात कर रहें हैं और वो आपको अनकम्फर्टेबल लग रहा है तो देखें कि क्या सामने वाला इंसान सच में वो काम करने के लिए इच्छुक है। कंसेंट क्या है 

शुरुवाती दौर में ही बच्चो को सिखा देना चाहिए की किसी की निजी सीमाओं का आदर कैसे करते हैं। इनको नॉन-सेक्सुअल उदाहरण के साथ सिखाना चाहिए जैसे की अपने खिलोने आपस मे बाटना या किसी से गले लगना। साथ ही साथ बच्चों को उनके प्राइवेट शरीर के पार्ट्स के बारें में भी बताएं की उनकी क्या ज़रूरत है और उनके प्रॉपर क्या नाम हैं।

बाद में कुछ साल बाद जब वो बड़े होजाए तब उनको डिटेल में बताएं जब वो समझने लायक हो जाते हैं। इसमें सहमति देना और ये डिजिटल जगह पर कैसे काम करता है बताएं।

बड़े बच्चों को बताएं की सेक्सुअल प्रक्रिया हम किसी के साथ मिलकर करते हैं न की किसीको करते हैं। सहमति किसी भी प्रोसेस के लिए सबसे जरुरी बात होती हैऔर ये हमेशा फ्री होकर आपस मे सोच समझ कर देनी चाहिए।

कंसेंट / सहमति का मतलब ये नहीं होता की जब तक सामने वाला नो नहीं बोलता हम कुछ भी कर सकतें हैं।

कंसेंट का मतलब है की सामने वाला खुश होकर यस बोले। अगर आपका पार्टनर यस बोलने में हिचकता है तो ये बहुत इम्पोर्टेन्ट हो जाता है की आप उनकी बॉडी लैंग्वेज और एक्सप्रेशंस से उनकी बात को समझें। और अगर आपको कभी भी लगता है की आपका पार्टनर जितना आप एन्जॉय कर रहें हैं उतना नहीं कर रहा है तो आप रुकें और बात करें।

इसका मतलब ये भी होता है की समय समय आप आपके पार्टनर की बात समझते रहें।

यंग लोगोंको ये भी समझना चाहिए की इस वजहसे की आपने किसी काम के लिए पहले सहमति दी थी इसका मतलब ये नई की आप को अब सहमति देना भी जरुरी है। आपके पास अधिकार है की आप मन कर सकतें हैं और इससमे कोई बुराई नहीं है। कंसेंट क्या है 

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