व्यक्ति का स्वभाव बहुत ही चपल एवं परिवर्तनशील होता है। यह मानव की प्रवृत्ति है कि उसे किसी भी परिस्थिति में गुणों से पहले अवगुण व दोष नज़र आते हैं। कोरोना काल जैसी विपत्ति किसी भी व्यक्ति के जीवन में कभी ही आती है। कोरोना काल में व्यक्ति ने अपने जीवन अस्तित्व (existence) को खतरे में पाया और इसी कारणवश अपने आप को निराशा से भर दिया। कोरोना ने हमें यह अवसर दिया कि हम अपने जीवन को फिर से सकारात्मक बना सकें। इसलिए हमें कोरोना काल को आपदा में अवसर की तरह देखना चाहिए।

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अगर मैं यह कहूँ की सबसे बड़ी सीख जो हमें कोरोना काल ने दी है वो अपनी फैमिली, अपने परिवार का महत्त्व हमें दोबारा सीखा दिया, तो इसमें कोई दो राय नहीं होगी। मैं एक संयुक्त परिवार में पली-बढ़ी हूँ। और शायद इसी कारण दूसरों से थोड़ा ज्यादा परिवार के साथ होने की अहमियत समझती हूँ। जब कोरोना के शुरूवाती दिनों में लॉक-डाउन लगा था और कई लोग अपने घर नहीं जा पा रहे थे, अपने परिवार से दूर इस बीमारी से अकेले लड़ रहे थे तब, मैंने अपने आप को अपने परिवारजन के बीच सुरक्षित पाया और खुद को खुशकिस्मत समझ लिया। एक दूसरे के साथ समय व्यतीत करना, दूसरों की परवाह करना, ख्याल रखना, स्वयं को छोड़ दूसरों के बारे में सोचना, यह सब हमें फिर से सीखा। अपने प्रियजनों को खो देने के ख्याल ने हमें दोबारा उनके पास होने का अहसास कराया। कोरोना की सीख

दूसरी बात जो हमें सीखने को मिली वो था पेशेंस / धैर्य। ऐसा शायद पहली बार ही हुआ होगा कि लोगों को इतने समय के लिए अपने घरों में बंद रहना पड़ा होगा। बच्चों की पढ़ाई से लेकर बड़े- बड़े कारखानों के सारे कार्य ऑनलाइन मोड पर हो रहे थे। सभी को वैक्सीन के आने का इंतजार सताये जा रहा था कि सब कुछ पहले की भांति हो जाए। इस दौरान हमने स्वयं तथा अपने परिवार और मित्रों को संभाला, उनका साथ दिया। हमनें अपना आपा खोये बगैर धैर्य और हिम्मत से काम लिया।

तीसरा, हमनें अपने आपको,अपने इनर सेल्फ को और बेहतर तरीके से जाना। स्वयं के साथ समय बिताने से हमें अपनी पसंद – नापसंद, नई होबिज़ आदि का ज्ञान हुआ। अपनी होबिज़ एवं पैशन को हम ने दूसरा मौका दिया और उन्हें फिर से जिया। कई नई चीजों पर अपना हाथ जमाया और अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर आकर कुछ कार्य किये। 

चौथी बात यह सीखी की प्रकृति अपने आपको हील करने का तरीका खोज ही लेती है। मानव कभी भी प्रकृति को अपनी मुट्ठी में नहीं कर सकता। वह उसके साथ कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता। यदि ऐसा हुआ तो हमें विपरीत परिणामों का सामना करना ही होगा। मानव जाति को यह समझना होगा कि हम जितना प्रकृति से ले रहे हैं, हमें उसे सूद- समेत लौटाना भी होगा।

आखिरी बात जो हम सीख सकते हैं कि जो वक्त एक बार चला जाए वो लौट कर दुबारा नहीं आता। इसलिए हमें हर परिस्थिति में आनंद खोजना चाहिए। कई लोग इस बात से दुःखी थे कि कोरोना काल के दौरान उनका अमूल्य समय घर में बैठे खराब हो गया परंतु यदि हम सकारात्मक बने और दूसरी तरफ देखे तो हमें यह ज्ञात होगा कि हमने कितना कुछ नया सीखा, हमारे व्यक्तित्व में कितना बदलाव आया, और हमारा जीवन को देखने का नज़रिया ही बदल गया। 

हर विपदा अपने साथ कोई न कोई अवसर ज़रूर लाती है। हमें बस इतना चाहिए कि हम उस अवसर को जाने न दें। कोरोना की सीख

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