स्टडी में सामने आया कोरोना पेशेंट के आंसू से भी हो सकता है कोरोना

स्टडी में सामने आया कोरोना पेशेंट के आंसू से भी हो सकता है कोरोना स्टडी में सामने आया कोरोना पेशेंट के आंसू से भी हो सकता है कोरोना

SheThePeople Team

02 Aug 2021







कोरोना पेशेंट के आंसू - कोरोना की दूसरी लहर फिल्हाल थमी ही है और तीसरी लहर के आने को लेकर सभी परेशान हैं। एक स्टडी में ऐसा सामने आया है कि कोरोना पॉजिटिव पेशेंट के आंसू से भी आप संक्रमित हो सकते हैं। अमृतसर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज की स्टडी में यह सामने आया है। सांस के ज़रिये इन्फेक्शन होना सबसे मैन सोर्स है ट्रांसमिशन का इसके बाद यह मुँह से, पॉटी से और दूसरे सेक्रीशन से हो सकता है।

इसके लिए कोरोना होने के बाद 48 घंटे के अंदर पेशेंट के आसु के सैंपल लिए गए थे जिसके बाद यह रिजल्ट सामने आया है। 120 में से 21 लोगों के आंसू के RT-PCR में कोरोना पॉजिटिव आया था।

कोरोना के इंडिया में क्या हालात हैं?  कोरोना पेशेंट के आंसू

कोरोना के मामले अभी कुछ समय से थमे हुए थे लेकिन अब फिर से बढ़ना चालू हो गए हैं। सरकार और साइंटिस्ट का कहना है कि कोरोना के मामले बढ़ना अगस्त से शुरू हो जायेंगे और अब आज 2 अगस्त है और मामले बढ़ते नज़र भी आ रहे हैं। कोरोना की तीसरी लहर दूसरी जितनी खतरनाक तो नहीं होगी लेकिन नुकसान तो जरूर होगा।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि डेल्टा वैरिएंट जो कि चिकनपॉक्स जितना जल्दी फैलता है और वैक्सीन लगे हुए लोगों को भी हो सकता है और यही थर्ड वेव को बढ़ावा देगा। इंडिया में अभी 40,000 के करीब केसेस निकल रहे हैं और इस संडे को 541 डेथ हुई हैं। डेल्टा के कारण केसेस कई हद तक बढ़ सकते हैं और मामला सीरियस हो सकता है। एक्सपर्ट्स ने यह भी कहा कि अगस्त में एक दिन के मामले 1,00,000 क्रॉस नहीं होंगे अगर बेस्ट तरीके से ध्यान दिया जाये तो।

डेल्टा वैरिएंट क्या होता है ? कोरोना पेशेंट के आंसू

डेल्टा वैरिएंट कोरोना का ही एक टाइप है और यह इसलिए इतना खतरनाक है क्योंकि ये कोविद वायरस के स्पाइक प्रोटीन में पाया जाता है। यही प्रोटीन इंसान के सेल्स में जाकर घुसता है। स्टडीज में आया है कि ये आसानी से फैलता है, बढ़ता जल्दी है और लंग सेल्स पर स्ट्रॉन्ग्ली असर करता है। दिल्ली के रिसरचर्स के कहना है कि दिल्ली में हुए इन्फेक्शन्स में तीन चौथाई में ये वैरिएंट पाया गया। ये इन्फेक्शन उन लोगों में हुए जो पहले से ही वैक्सीन ले चुके हैं। इस में से 8% लोगों को कप्पा वैरिएंट और 76% को डेल्टा वैरिएंट हुआ था।

 

 

 

 


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