वजाइना महिलाओं के शरीर का एक बहुत जरूरी भाग होता है। आज भी वजाइना को लेकर बहुत सारे गलत मिथ फैले हुए हैं। हम में से आज कोई भी अपने लेडी पार्ट्स के बारे में खुल कर बात करने को तैयार नहीं है। हम सब इस बात से अनजान नहीं हैं कि वजाइना रिप्रोडक्शन और सेक्सुअल सेटिस्फेक्शन के लिए कितना ज़रूरी है।

क्या बार-बार सेक्सुअल इंटरकोर्स से वजाइना लूज हो जाता है?

नहीं, यह बिल्कुल भी सच नहीं है। हमारा वजाइना मसल्स से बना हुआ होता है और यह एक बहुत ही एक्सपेंडिंग (विस्तार करने वाला) ऑर्गन है। जब आप सेक्स करती हैं, तब यह उतना स्ट्रेच हो जाता है और बाद में ये फिर से अपनी जगह पर आ जाता है।

ऐसा क्यों होता है? क्योंकि हमारा वजाइना बहुत इलास्टिक होता है। वजाइना के चारों तरफ पेल्विक फ्लोर को जो भी मसल्स बनाती हैं, उनमें विस्तार करने की प्रवृत्ति होती है। इसलिए वजाइना वाकई में एक्सपेंड करता है ताकि हम एक शिशु को जन्म दे सकें।

सेक्सुअल अराउजल, डिलीवरी, या चाइल्डबर्थ के समय पर यह अपने आपको स्ट्रेच कर लेता है। उसके बाद ये अपनी इलास्टिक पावर से फिर से टाइट होकर अपनी पोजीशन पर आ जाता है। तो यह कहना गलत होगा कि बार-बार सेक्स करने से हमारा वजाइना लूज होता है।

क्या बच्चा पैदा होने के बाद वजाइना लूज हो सकता है?

हां, एक बार बच्चे के पैदा होने के बाद आपका वजाइना थोड़ा लूज हो सकता है। लेकिन उसे फिर से अपनी पोजीशन पर लाने के लिए हम कीगल (Kegels) एक्सरसाइज कर सकते हैं। कीगल एक्सरसाइज को “पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज” भी कहा जाता है।

उम्र के साथ, आपकी पेल्विक फ्लोर मसल्स कमजोर हो जाती हैं, जैसे प्रेगनेंसी, डिलीवरी,सर्जरी, बढ़ती उम्र, कब्ज से मांसपेशियों में अत्यधिक तनाव आना, मोटापा आदि। कीगल एक्सरसाइज, पेल्विक फ्लोर मसल्स को मजबूत करती हैं।

इस एक्सरसाइज को करते समय पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को कुछ देर सिकोड़कर (टाइट करके), फिर कुछ देर ढीला छोड़ा जाता है, ठीक उसी तरह जिस प्रकार यूरिन रोकने का प्रयास किया जाता है। यह एक्सरसाइज भी उसी तरह से की जाती है।

इस बात का विशेष ख्याल रखें कि एक्सरसाइज के दौरान कमर, पेट और थाईज की मसल्स को ढीला ही रखें।
सिकोड़ने और छोड़ने के लिए 10 सेकंड का समय ले सकते हैं। इस प्रक्रिया को कुछ बार दोहराएं।

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