Dr. Kamal Ranadive Doodle: गूगल डूडल ने भारतीय सेल बायोलॉजिस्ट की 104 जयंती मनाई, जानिए डॉ कमल रणदिवे के बारे में

Dr. Kamal Ranadive Doodle: गूगल डूडल ने भारतीय सेल बायोलॉजिस्ट की 104 जयंती मनाई, जानिए डॉ कमल रणदिवे के बारे में Dr. Kamal Ranadive Doodle: गूगल डूडल ने भारतीय सेल बायोलॉजिस्ट की 104 जयंती मनाई, जानिए डॉ कमल रणदिवे के बारे में

SheThePeople Team

08 Nov 2021


Dr. Kamal Ranadive Doodle: गूगल ने आज के दिन को भारतीय सेल बायोलॉजिस्ट डॉ कमल रानादिवे को एक खास डूडल समर्पित किया उनकी 104वीं जयंती के अवसर पर। ग्लोबल खोज इंजन ने रणदिवे का जन्मदिन मनाया क्योंकि वह कैंसर रिसर्च के लिए जानी जाती हैं और वह विज्ञान और शिक्षा के माध्यम से एक इक्विटेबल समाज बनाना चाहती थी। आइए जानते हैं डॉक्टर कमल रणदिवे के बारे में खास बातें। 

गूगल डूडल के बारे में डिटेल

आज के गूगल डूडल को भारत के अतिथि कलाकार इब्राहिम रायिन्ताकाथ ने चित्रित किया है।  इस डूडल में डॉ कमल रणदिवे की तस्वीर के साथ टेलीस्कोप, सेल्स, आदि दिखाई दिया। इब्राहिम रायिन्ताकाथ ने डूडल बनाने के बाद कहा, 



मुझे उनके जीवन और कार्य की गहराई में जाने और क्षेत्र में उनकी प्रतिभा को समझने का मौका मिला। सिर्फ काम ही नहीं, बल्कि यह भी कि कैसे वह एक ऐसी व्यक्ति थीं, जो मुझे पार नहीं कर पातीं।



कौन थी डॉ कमल रणदिवे? 

कमल समरथ, जिन्हे कमल रणदिवे के नाम से जाना जाता है, आज ही के दिन 1917 में पुणे, भारत में जन्म हुआ था। वह ब्रेस्ट कैंसर और हेरेडिटी के बीच संबंध का प्रस्ताव करने वाली भारत की पहली रिसर्चर में से एक थीं। इसके साथ ही रणदिवे को कैंसर और वायरस के बीच संबंधों के बारे में रिसर्च के लिए जाना जाता है। 

उन्होंने माइकोबैक्टीरियम लेप्रे का भी अध्ययन किया, जो लेप्रोसी रोग का कारण बनता है, और वैक्सीन डेवलप करने में मदद की। चिकित्सा शिक्षा के लिए उनके पिता के प्रोत्साहन ने रणदिवे को एकेडमिक रूप से एक्सीलेंस प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया, लेकिन उसने उसे बायोलॉजी में अपनाया। रणदिवे के पिता दिनकर, पुणे के एक फर्गसन कॉलेज में बायोलॉजी के प्रोफेसर हुआ करते थे। उनके पिता का मानना था कि घर के हर बच्चे को अच्छी शिक्षा प्राप्त होनी चाहिए खासकर की लड़कियों को। 

डॉ कमल रणदिवे की अचीवमेंट

1949 में, डॉ कमल रणदिवे, भारतीय कैंसर अनुसंधान केंद्र (ICRC) में एक रिसर्चर के रूप में काम करते हुए उन्हें साइटोलॉजी (स्टडी ऑफ सेल) में डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त हुए। बाल्टीमोर, मैरीलैंड, यूएसए में जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में फेलोशिप के बाद, वह मुंबई और ICRC लौट आई, जहाँ उन्होंने देश की पहली टिशू कल्चर लेबोरेटरी की स्थापना की।

1973 में, रणदिवे ने अपने 11 सहयोगियों के साथ साइंटिफिक फील्ड में महिलाओं का समर्थन करने के लिए भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ (IWSA) की स्थापना की। रिटायर होने के बाद, रणदिवे ने महाराष्ट्र में रूरल कम्यूनिटीज में काम किया, जहां उन्होंने महिलाओं को स्वास्थ्य कर्मियों के रूप में ट्रेनिंग दी और स्वास्थ्य और पोषण शिक्षा प्रदान की। 

डॉ कमल रणदिवे, विदेश रहने वाले भारतीय छात्रों और स्कॉलर्स को भारत लौटने के लिए प्रोत्साहित करती थी और उन्हें उनके ज्ञान को अपनी कम्युनिटी के लिए काम करने के लिए लगाने को कहती थीं। IWSA के अब भारत में 11 अध्याय हैं और यह विज्ञान में महिलाओं के लिए स्कॉलरशिप और चाइल्डकैअर विकल्प प्रदान करता है।

जन्मदिन मुबारक, डॉ कमल रणदिवे!





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