कई लोग मेंस्ट्रूअल हाइजीन को काफ़ी नज़अंदाज़ करते हैं। हालांकि बदलते वक़्त के साथ लोग स्वास्थ्य और पीरियड्स के मुद्दे पर काफ़ी अवेयर हुए है। धीरे -धीरे ही सही लेकिन बदलाव आ रहा हैं। ऐसा ही एक बदलाव ‘पीरियड रूम’ के ज़रिये देखने को मिला है ,यह पीरियड रूम ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा बनाये गए है।

पहली बार, non-governmental organisation (NGO) की मदद से, ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (TMC) ने शहर के शौचालय में महिलाओं के लिए पीरियड रूम की व्यवस्था की है।ठाणे स्लम एरिया में लगभग 1000 महिलाओं से सर्वे करने के बाद इस कदम को उठाया गया। सर्वे में बस्ती में रहने वाली महिलाओं से उनके पीरियड्स के दौरान आने वाली चुनौतियों को हाईलाइट किया गया।

पीरियड रूम में शीशा ,बॉटम लिड वाला डस्टबिन जो आपको गंदे सेनिटरी नैपकिन को छूने से बचाता है ,साबुन निकालने की मशीन (soap dispenser) ,कपड़े टांगने के लिए हुक और चौबीसो घंटे जेटस्प्रे पानी की सुविधा भी उपलब्ध है।

Muse Foundation ने दिया था सुझाव

Muse Foundation द्वारा किए गए रिसर्च के बाद यह देखा गया कि स्क्वैटर(squatter) बस्तियों में रहने वाली महिलाओं के लिए अपने पीरियड्स को मैनेज करना बहुत मुश्किल है। उनके इसी समस्या के समाधान के लिए NGO ने “पीरियड रूम” का सुझाव दिया।

डिप्टी कमिश्नर का बयान

“2019 में ठाणे की 15 स्लम बस्तियों में 1000 महिलाओं पर सर्वे कराया गया ,सर्वे का लक्ष्य महिलाओं की मेंस्ट्रूअल हाइजीन के बारे में जानना था। सर्वे में महिलाओं की स्थिति बहुत ख़राब पाई गयी ,पानी की कमी,असुरक्षित चेंजिंग रूम, गंदे नैपकिन के लिए डिस्पोजल मैकेनिज्म का न होना जैसी कई समस्याएं पाई गयी ” मनीष जोशी, डिप्टी कमिश्नर , ठाणे नगर निगम।

स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए बाथरूम की दीवार पर डेकोरेशन की गयी है। महिलाओं को जागरूक करने के लिए मेंस्ट्रुएशन से रिलेटेड इनफार्मेशन के पोस्टर लगाए गए है। रीसायकल बिन ने मेंस्ट्रुएशन के दौरान स्वच्छता की समस्याओं का सामना करने वाली महिलाओं को अवेयर करने के लिए कमरे डिजाइन किए है।

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