Girl Abandoned By Parents For Refusing Child Marriage: राजस्थान में 14 साल की बच्ची को बाल विवाह के लिए मना करने की हिम्मत दिखाने पर माता-पिता ने छोड़ दिया

Published by
Muskan Mahajan

Girl Abandoned By Parents For Refusing Child Marriage: उदयपुर के भूटिया गांव में 14 साल की बच्ची के 21 नवंबर को शादी से इनकार करने पर उसके माता-पिता ने घर में घुसने से मना कर दिया। माता-पिता ने बच्ची को घर के बाहर ही रखा और उन्हें बिलकुल भी तरस नहीं आया की वह अपनी बच्ची के साथ इस तरह का व्यवहार कर रहे थे। मां बेटी को घर के अंदर से गालियां देती रही जबकि बेटी बाहर खड़ी रोती रही। 

बच्ची ने शादी से पहले क्या किया?

एक 14 वर्षीय लड़की के माता-पिता ने उसे इस डर से अस्वीकार कर दिया है की उसका बाल विवाह रद्द होने के बाद, उन्हें सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया जाएगा। 

यह घटना उदयपुर के कुरुबारा क्षेत्र के भाटिया गांव की है। बच्ची की शादी रविवार को होनी थी, लड़की ने पूरे साहस के साथ बाल आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल को बुलाया। उसने अपनी शादी का कार्ड भी बेनीवाल को अपनी वास्तविक पहचान स्थापित करने के लिए भेजा था। 

बच्ची के माता-पिता ने कैसे रिएक्ट किया?

बच्ची के माता पिता को समाज से निकले जाने का दर था क्योंकि उनके हिसाब से उनकी बच्ची ने उनकी समाज में नाक कटा दी। बच्ची की मां ने कहा, “वह हमारे लिए मर चुकी है क्योंकि उसने शादी से इनकार करके, वह गांव में हमारी इज्जत की रक्षा करने में विफल रही है।” इसके साथ ही बच्ची की मां उससे गलियां देती रही वही दूसरी तरफ बच्ची उनसे माफी मांगी रही।

संगीता बेनीवाल ने इस मामले में क्या किया?

बेनीवाल के उकसाने पर, जिला एडमिनिस्ट्रेशन हरकत में आया और गांव पहुंचकर शादी रोक दी। बच्चे को कंसोल किया और उदयपुर के एक शेल्टर होम में भेजा गया। “हम उसकी देखभाल तब तक करेंगे, जब तक उसके माता-पिता उसे स्वीकार नहीं कर लेते।”, बेनीवाल ने कहा।

बाद में, बेनीवाल उदयपुर गई और लड़की से मिली। जब 14 साल की लड़की ने उससे कहा कि, वह अपने माता-पिता के साथ रहना चाहती है, तो बेनीवाल उसे वापस गांव ले गई लेकिन लड़की के माता-पिता ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। बच्ची के माता-पिता को मनाने के लिए कई लोग सामने आए जैसे पंचायत अधिकारी और गांव के लोग। सभी ने बच्ची के माता-पिता से बच्ची की ओर से माफी मांगी लेकिन असफल रहे। 

संगीता ने कहा कि माता-पिता की फटकार परेशान करने वाली थी लेकिन उन्हें सामाजिक बहिष्कार का डर था। साथ ही, ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। ‘तब हमारे पास उसे वापस शेल्टर होम भेजने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उसके माता-पिता के आने तक उसकी देखभाल करेंगे, हम उससे शिक्षा प्रदान करेंगे क्योंकि वह पढ़ने के लिए बहुत उत्सुक है।” बेनीवाल ने कहा। इसके साथ ही संगीता बेनीवाल ने, पुलिस और जिला एडमिनिस्ट्रेशन को भविष्य में इसी तरह के बाल विवाह पर नजर रखने के निर्देश दिए।

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